अस्यां वपुर्व्यूहविधानविद्यां
किं द्योतयामास नवां स कामः ।
प्रत्यङ्गसङ्गस्फुटलब्धभूमा
लावण्यसीमा यदिमामुपास्ते ॥
अस्यां वपुर्व्यूहविधानविद्यां
किं द्योतयामास नवां स कामः ।
प्रत्यङ्गसङ्गस्फुटलब्धभूमा
लावण्यसीमा यदिमामुपास्ते ॥
किं द्योतयामास नवां स कामः ।
प्रत्यङ्गसङ्गस्फुटलब्धभूमा
लावण्यसीमा यदिमामुपास्ते ॥
अन्वयः
AI
यत् लावण्यसीमा प्रत्यङ्गसङ्गस्फुटलब्धभूमा (सती) इमाम् उपास्ते, (तत्) किं सः कामः अस्याम् नवां वपुर्व्यूहविधानविद्यां द्योतयामास?
Summary
AI
Since the pinnacle of loveliness, having clearly found its full expression in contact with her every limb, resides in her, is it that Kama (the god of love) has manifested in her a new science of creating bodily forms?
पदच्छेदः
AI
| अस्याम् | इदम् (७.१) | in her |
| वपुर्व्यूहविधानविद्याम् | वपुस्–व्यूह–विधान–विद्या (२.१) | a science of creating bodily forms |
| किम् | किम् | Is it that |
| द्योतयामास | द्योतयामास (√द्युत् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | manifested |
| नवाम् | नव (२.१) | new |
| सः | तद् (१.१) | that |
| कामः | काम (१.१) | Kama |
| प्रत्यङ्गसङ्गस्फुटलब्धभूमा | प्रति–अङ्ग–सङ्ग–स्फुट–लब्ध (√लभ्+क्त)–भूमन् (१.१) | having clearly found its full expression in contact with her every limb |
| लावण्यसीमा | लावण्य–सीमन् (१.१) | the pinnacle of loveliness |
| यत् | यद् | Since |
| इमाम् | इदम् (२.१) | this one |
| उपास्ते | उपास्ते (उप√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | resides in |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्यां | व | पु | र्व्यू | ह | वि | धा | न | वि | द्यां |
| किं | द्यो | त | या | मा | स | न | वां | स | का | मः |
| प्र | त्य | ङ्ग | स | ङ्ग | स्फु | ट | ल | ब्ध | भू | मा |
| ला | व | ण्य | सी | मा | य | दि | मा | मु | पा | स्ते |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.