पदे विधातुर्यदि मन्मथो वा
ममाभिषिच्येत मनोरथो वा ।
तदा घटेतापि न वा तदेत-
त्प्रतिप्रतीकाद्भुतरूपशिल्पम् ॥
पदे विधातुर्यदि मन्मथो वा
ममाभिषिच्येत मनोरथो वा ।
तदा घटेतापि न वा तदेत-
त्प्रतिप्रतीकाद्भुतरूपशिल्पम् ॥
ममाभिषिच्येत मनोरथो वा ।
तदा घटेतापि न वा तदेत-
त्प्रतिप्रतीकाद्भुतरूपशिल्पम् ॥
अन्वयः
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यदि मन्मथः वा मम मनोरथः वा विधातुः पदे अभिषिच्येत, तदा एतत् प्रतिप्रतीकाद्भुतरूपशिल्पम् घटेत अपि वा न (घटेत)।
Summary
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(Nala thought:) "If either Kama, the god of love, or my own personified desire were to be installed in the position of the Creator Brahma, even then this artistry of a wonderfully formed body, marvelous in every limb, might or might not be accomplished."
पदच्छेदः
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| पदे | पद (७.१) | in the position |
| विधातुः | विधातृ (६.१) | of the Creator |
| यदि | यदि | If |
| मन्मथः | मन्मथ (१.१) | Kama (god of love) |
| वा | वा | or |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| अभिषिच्येत | अभिषिच्येत (अभि√सिच् भावकर्मणोः विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | were to be installed |
| मनोरथः | मनोरथ (१.१) | desire |
| वा | वा | or |
| तदा | तदा | then |
| घटेत | घटेत (√घट् कर्तरि विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | could be accomplished |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| वा | वा | or |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| प्रतिप्रतीकाद्भुतरूपशिल्पम् | प्रति–प्रतीक–अद्भुत–रूप–शिल्प (१.१) | artistry of a wonderfully formed body, marvelous in every limb |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | दे | वि | धा | तु | र्य | दि | म | न्म | थो | वा |
| म | मा | भि | षि | च्ये | त | म | नो | र | थो | वा |
| त | दा | घ | टे | ता | पि | न | वा | त | दे | त |
| त्प्र | ति | प्र | ती | का | द्भु | त | रू | प | शि | ल्पम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||
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