रज्यस्व राज्ये जगतामितीन्द्रा-
त्याच्ञाप्रतिष्ठां लभसे त्वमेव ।
लघूकृतस्वं बलियाचनेन
तत्प्राप्तये वामनमामनन्ति ॥
रज्यस्व राज्ये जगतामितीन्द्रा-
त्याच्ञाप्रतिष्ठां लभसे त्वमेव ।
लघूकृतस्वं बलियाचनेन
तत्प्राप्तये वामनमामनन्ति ॥
त्याच्ञाप्रतिष्ठां लभसे त्वमेव ।
लघूकृतस्वं बलियाचनेन
तत्प्राप्तये वामनमामनन्ति ॥
अन्वयः
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'जगताम् राज्ये रज्यस्व' इति इन्द्रात् याच्ञाप्रतिष्ठाम् त्वम् एव लभसे । बलियाचनेन लघूकृतस्वम् (विष्णुम्) तत्प्राप्तये वामनम् आमनन्ति ।
Summary
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"You alone receive from Indra the honor of this request: 'Rule over the kingdom of the worlds.' To attain that very kingdom, Vishnu had to belittle himself by begging from Bali, for which he is called Vamana, the dwarf. But you are being offered it freely."
पदच्छेदः
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| रज्यस्व | रज्यस्व (√रञ्ज् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | rule |
| राज्ये | राज्य (७.१) | in the kingdom |
| जगताम् | जगत् (६.३) | of the worlds |
| इति | इति | thus |
| इन्द्रात् | इन्द्र (५.१) | from Indra |
| याच्ञाप्रतिष्ठाम् | याच्ञा–प्रतिष्ठा (२.१) | the honor of a request |
| लभसे | लभसे (√लभ् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you obtain |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| एव | एव | alone |
| लघूकृतस्वम् | लघूकृत (√कृ+क्त)–स्व (२.१) | one who made himself small |
| बलियाचनेन | बलि–याचन (३.१) | by begging from Bali |
| तत्प्राप्तये | तद्–प्राप्ति (४.१) | for its attainment |
| वामनम् | वामन (२.१) | Vamana (the dwarf) |
| आमनन्ति | आमनन्ति (आ√मन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they call |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | ज्य | स्व | रा | ज्ये | ज | ग | ता | मि | ती | न्द्रा |
| त्या | च्ञा | प्र | ति | ष्ठां | ल | भ | से | त्व | मे | व |
| ल | घू | कृ | त | स्वं | ब | लि | या | च | ने | न |
| त | त्प्रा | प्त | ये | वा | म | न | मा | म | न | न्ति |
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