तस्मिन्नियं सेति सखीसमाजे
नलस्य संदेहमथ व्युदस्यन् ।
अपृष्ट एव स्फुटमावचक्षे
स कोऽपि रूपातिशयः स्वयं ताम् ॥
तस्मिन्नियं सेति सखीसमाजे
नलस्य संदेहमथ व्युदस्यन् ।
अपृष्ट एव स्फुटमावचक्षे
स कोऽपि रूपातिशयः स्वयं ताम् ॥
नलस्य संदेहमथ व्युदस्यन् ।
अपृष्ट एव स्फुटमावचक्षे
स कोऽपि रूपातिशयः स्वयं ताम् ॥
अन्वयः
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अथ सखीसमाजे 'तस्मिन् इयम् सा' इति नलस्य संदेहम् व्युदस्यन् सः कः अपि रूपातिशयः अपृष्टः एव स्वयम् ताम् स्फुटम् आवचक्षे ।
Summary
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Then, to dispel Nala's doubt among the group of friends as to 'which one is she?', a certain indescribable excellence of her beauty, though unasked, itself clearly pointed her out.
पदच्छेदः
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| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that |
| इयम् | इदम् (१.१) | this one |
| सा | तद् (१.१) | that one |
| इति | इति | thus |
| सखीसमाजे | सखी–समाज (७.१) | in the group of friends |
| नलस्य | नल (६.१) | Nala's |
| संदेहम् | संदेह (२.१) | doubt |
| अथ | अथ | then |
| व्युदस्यन् | व्युदस्यत् (वि+उद्√अस्+शतृ, १.१) | dispelling |
| अपृष्टः | अपृष्ट (√प्रछ्+क्त, १.१) | unasked |
| एव | एव | indeed |
| स्फुटम् | स्फुटम् | clearly |
| आवचक्षे | आवचक्षे (आ√वच् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | revealed |
| सः | तद् (१.१) | that |
| कः | किम् (१.१) | some |
| अपि | अपि | indescribable |
| रूपातिशयः | रूप–अतिशय (१.१) | excellence of beauty |
| स्वयम् | स्वयम् | itself |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्नि | यं | से | ति | स | खी | स | मा | जे |
| न | ल | स्य | सं | दे | ह | म | थ | व्यु | द | स्यन् |
| अ | पृ | ष्ट | ए | व | स्फु | ट | मा | व | च | क्षे |
| स | को | ऽपि | रू | पा | ति | श | यः | स्व | यं | ताम् |
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