एतं नलं तं दमयन्ति पश्य
त्यजार्तिमित्यालिकुलप्रबोधान् ।
श्रुत्वा स नारीकरवर्तिसारी-
मुखात्स्वमाशङ्कत यत्र दृष्टम् ॥
एतं नलं तं दमयन्ति पश्य
त्यजार्तिमित्यालिकुलप्रबोधान् ।
श्रुत्वा स नारीकरवर्तिसारी-
मुखात्स्वमाशङ्कत यत्र दृष्टम् ॥
त्यजार्तिमित्यालिकुलप्रबोधान् ।
श्रुत्वा स नारीकरवर्तिसारी-
मुखात्स्वमाशङ्कत यत्र दृष्टम् ॥
अन्वयः
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यत्र सः "दमयन्ति! तम् एतम् नलम् पश्य, आर्तिम् त्यज" इति आलि-कुल-प्रबोधान् नारी-कर-वर्ति-सारी-मुखात् श्रुत्वा स्वम् दृष्टम् आशङ्कत।
Summary
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There, upon hearing exhortations from the mouths of parrots held in the hands of the maids, saying, "O Damayanti! Look at this Nala and abandon your suffering!", he (Nala) suspected that he himself had been seen.
पदच्छेदः
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| एतम् | एतद् (२.१) | this |
| नलम् | नल (२.१) | Nala |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| दमयन्ति | दमयन्ती (८.१) | O Damayanti! |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | see |
| त्यज | त्यज (√त्यज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | abandon |
| आर्तिम् | आर्ति (२.१) | suffering |
| इति | इति | thus |
| आलि-कुल-प्रबोधान् | आलि–कुल–प्रबोध (२.३) | the exhortations of the group of friends |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | having heard |
| सः | तद् (१.१) | he |
| नारी-कर-वर्ति-सारी-मुखात् | नारी–कर–वर्तिन्–सारी–मुख (५.१) | from the mouth of a parrot held in a woman's hand |
| स्वम् | स्व (२.१) | himself |
| आशङ्कत | आशङ्कत (आ√शङ्क् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | suspected |
| यत्र | यत्र | where |
| दृष्टम् | दृष्ट (√दृश्+क्त, २.१) | to have been seen |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | तं | न | लं | तं | द | म | य | न्ति | प | श्य |
| त्य | जा | र्ति | मि | त्या | लि | कु | ल | प्र | बो | धान् |
| श्रु | त्वा | स | ना | री | क | र | व | र्ति | सा | री |
| मु | खा | त्स्व | मा | श | ङ्क | त | य | त्र | दृ | ष्टम् |
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