अन्योन्यमन्यत्रवदीक्षमाणौ
परस्परेणाध्युषितेऽपि देशे ।
आलिङ्गितालीकपरस्परान्तः
तथ्यं मिथस्तौ परिषस्वजाते ॥
अन्योन्यमन्यत्रवदीक्षमाणौ
परस्परेणाध्युषितेऽपि देशे ।
आलिङ्गितालीकपरस्परान्तः
तथ्यं मिथस्तौ परिषस्वजाते ॥
परस्परेणाध्युषितेऽपि देशे ।
आलिङ्गितालीकपरस्परान्तः
तथ्यं मिथस्तौ परिषस्वजाते ॥
अन्वयः
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परस्परेण अध्युषिते देशे अपि अन्यत्र-वत् अन्योन्यम् ईक्षमाणौ तौ आलिङ्गित-अलीक-परस्पर-अन्तः (सन्तौ) तथ्यम् मिथः परिषस्वजाते ।
Summary
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Although they occupied the same space, they looked for each other as if elsewhere. Embracing the false image of each other within their minds, those two (Nala and Damayanti) truly embraced each other.
पदच्छेदः
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| अन्योन्यम् | अन्योन्यम् | each other |
| अन्यत्र | अन्यत्र | elsewhere |
| वत् | वत् | as if |
| ईक्षमाणौ | ईक्षमाण (√ईक्ष्+शानच्, १.२) | the two looking |
| परस्परेण | परस्पर (३.१) | by each other |
| अध्युषिते | अध्युषित (अधि√वस्+क्त, ७.१) | occupied |
| अपि | अपि | even though |
| देशे | देश (७.१) | in the place |
| आलिङ्गित | आलिङ्गित (आ√लिङ्ग्+क्त) | embraced |
| अलीक | अलीक | false |
| परस्पर | परस्पर | each other |
| अन्तः | अन्तस् | within |
| तथ्यम् | तथ्यम् | truly |
| मिथः | मिथस् | each other |
| तौ | तद् (१.२) | those two |
| परिषस्वजाते | परिषस्वजाते (परि√स्वञ्ज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | embraced |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न्यो | न्य | म | न्य | त्र | व | दी | क्ष | मा | णौ |
| प | र | स्प | रे | णा | ध्यु | षि | ते | ऽपि | दे | शे |
| आ | लि | ङ्गि | ता | ली | क | प | र | स्प | रा | न्तः |
| त | थ्यं | मि | थ | स्तौ | प | रि | ष | स्व | जा | ते |
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