भवन्नदृश्यः प्रतिबिम्बदेह-
व्यूहं वितन्वन्मणिकुट्टिमेषु ।
पुरं परस्य प्रविशन्वियोगी
योगीव चित्रं स रराज राजा ॥
भवन्नदृश्यः प्रतिबिम्बदेह-
व्यूहं वितन्वन्मणिकुट्टिमेषु ।
पुरं परस्य प्रविशन्वियोगी
योगीव चित्रं स रराज राजा ॥
व्यूहं वितन्वन्मणिकुट्टिमेषु ।
पुरं परस्य प्रविशन्वियोगी
योगीव चित्रं स रराज राजा ॥
अन्वयः
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परस्य पुरम् प्रविशन् अदृश्यः भवन् मणि-कुट्टिमेषु प्रतिबिम्ब-देह-व्यूहम् वितन्वन् वियोगी सः राजा योगी इव चित्रम् रराज ।
Summary
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That separated king (Nala), entering another's city while being invisible, wonderfully shone like a yogi. He spread a multitude of his reflected bodies on the jeweled pavements, just as a yogi can enter another's body and multiply his own.
पदच्छेदः
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| भवन् | भवत् (√भू+शतृ, १.१) | being |
| अदृश्यः | अदृश्य (१.१) | invisible |
| प्रतिबिम्ब | प्रतिबिम्ब | reflection |
| देह | देह | body |
| व्यूहम् | व्यूह (२.१) | a multitude of |
| वितन्वन् | वितन्वत् (वि√तन्+शतृ, १.१) | spreading |
| मणि | मणि | jewel |
| कुट्टिमेषु | कुट्टिम (७.३) | on the pavements |
| पुरम् | पुर (२.१) | city |
| परस्य | पर (६.१) | of another |
| प्रविशन् | प्रविशत् (प्र√विश्+शतृ, १.१) | entering |
| वियोगी | वियोगिन् (१.१) | the separated lover |
| योगी | योगिन् (१.१) | a yogi |
| इव | इव | like |
| चित्रम् | चित्रम् | wonderfully |
| सः | तद् (१.१) | he |
| रराज | रराज (√राज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shone |
| राजा | राजन् (१.१) | the king |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | व | न्न | दृ | श्यः | प्र | ति | बि | म्ब | दे | ह |
| व्यू | हं | वि | त | न्व | न्म | णि | कु | ट्टि | मे | षु |
| पु | रं | प | र | स्य | प्र | वि | श | न्वि | यो | गी |
| यो | गी | व | चि | त्रं | स | र | रा | ज | रा | जा |
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