विलोक्य तच्छायमतर्कि ताभिः
पतिं प्रति स्वं वसुधापि धत्ते ।
यथा वयं किं मदनं तथैनं
त्रिनेत्रनेत्रानलकीलनीलम् ॥
विलोक्य तच्छायमतर्कि ताभिः
पतिं प्रति स्वं वसुधापि धत्ते ।
यथा वयं किं मदनं तथैनं
त्रिनेत्रनेत्रानलकीलनीलम् ॥
पतिं प्रति स्वं वसुधापि धत्ते ।
यथा वयं किं मदनं तथैनं
त्रिनेत्रनेत्रानलकीलनीलम् ॥
अन्वयः
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तत्-छायम् विलोक्य ताभिः अतर्कि - किम् वसुधा अपि, यथा वयम् (पतिम् प्रति स्वम् भावम् धत्ते), तथा एनम् त्रि-नेत्र-नेत्र-अनल-कील-नीलम् मदनम् (इव स्थितम्) पतिम् प्रति स्वम् (भावम्) धत्ते?
Summary
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Seeing his shadow, the women inferred: "Does the Earth also, just like us, hold affection for him as her husband? For him, who is like Cupid, dark as the flame from Shiva's third eye."
पदच्छेदः
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| विलोक्य | विलोक्य (वि√लोक्+ल्यप्) | having seen |
| तत् | तद् | his |
| छायम् | छाया (२.१) | shadow |
| अतर्कि | अतर्कि (√तर्क् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | it was inferred |
| ताभिः | तद् (३.३) | by them |
| पतिम् | पति (२.१) | husband |
| प्रति | प्रति | towards |
| स्वम् | स्व (२.१) | her own (affection) |
| वसुधा | वसुधा (१.१) | the earth |
| अपि | अपि | also |
| धत्ते | धत्ते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | holds |
| यथा | यथा | as |
| वयम् | अस्मद् (१.३) | we |
| किम् | किम् | does? |
| मदनम् | मदन (२.१) | Cupid |
| तथा | तथा | so |
| एनम् | इदम् (२.१) | him |
| त्रि | त्रि | three |
| नेत्र | नेत्र | eye |
| नेत्र | नेत्र | eye |
| अनल | अनल | fire |
| कील | कील | flame |
| नीलम् | नील (२.१) | dark like |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | लो | क्य | त | च्छा | य | म | त | र्कि | ता | भिः |
| प | तिं | प्र | ति | स्वं | व | सु | धा | पि | ध | त्ते |
| य | था | व | यं | किं | म | द | नं | त | थै | नं |
| त्रि | ने | त्र | ने | त्रा | न | ल | की | ल | नी | लम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||
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