तस्मिन्विषज्यार्धपथात्तपातं
तदङ्गरागच्छुरितं निरीक्ष्य ।
विस्मेरतामापुरविस्मरन्त्यः
क्षिप्तं मिथः कन्दुकमिन्दुमुख्यः ॥
तस्मिन्विषज्यार्धपथात्तपातं
तदङ्गरागच्छुरितं निरीक्ष्य ।
विस्मेरतामापुरविस्मरन्त्यः
क्षिप्तं मिथः कन्दुकमिन्दुमुख्यः ॥
तदङ्गरागच्छुरितं निरीक्ष्य ।
विस्मेरतामापुरविस्मरन्त्यः
क्षिप्तं मिथः कन्दुकमिन्दुमुख्यः ॥
अन्वयः
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इन्दु-मुख्यः मिथः क्षिप्तम् कन्दुकम् तस्मिन् विषज्य अर्ध-पथात् आत्त-पातम् तत्-अङ्ग-राग-च्छुरितम् निरीक्ष्य अविस्मरन्त्यः (सत्यः) विस्मेरताम् आपुः ।
Summary
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The moon-faced women, while playing, threw a ball to each other. Seeing it stick to the invisible Nala, its fall arrested midway, and smeared with his body-paint, they were filled with an unforgettable astonishment.
पदच्छेदः
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| तस्मिन् | तद् (७.१) | on him |
| विषज्य | विषज्य (वि√सञ्ज्+ल्यप्) | having stuck |
| अर्ध | अर्ध | mid |
| पथात् | पथ (५.१) | from the path |
| आत्त | आत्त (आ√दा+क्त) | arrested |
| पातम् | पात (२.१) | whose fall |
| तत् | तद् | his |
| अङ्ग | अङ्ग | body |
| राग | राग | paint |
| च्छुरितम् | छुरित (२.१) | smeared with |
| निरीक्ष्य | निरीक्ष्य (निस्√ईक्ष्+ल्यप्) | having seen |
| विस्मेरताम् | विस्मेरता (२.१) | astonishment |
| आपुः | आपुः (√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | attained |
| अविस्मरन्त्यः | अविस्मरन्ती (वि√स्मृ+शतृ, १.३) | not forgetting |
| क्षिप्तम् | क्षिप्त (√क्षिप्+क्त, २.१) | thrown |
| मिथः | मिथस् | to each other |
| कन्दुकम् | कन्दुक (२.१) | the ball |
| इन्दु | इन्दु | moon |
| मुख्यः | मुख (१.३) | faced women |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | न्वि | ष | ज्या | र्ध | प | था | त्त | पा | तं |
| त | द | ङ्ग | रा | ग | च्छु | रि | तं | नि | री | क्ष्य |
| वि | स्मे | र | ता | मा | पु | र | वि | स्म | र | न्त्यः |
| क्षि | प्तं | मि | थः | क | न्दु | क | मि | न्दु | मु | ख्यः |
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