तां कुण्डिनाख्यापदमात्रगुप्ताम्
इन्द्रस्य भूमेरमरावतीं सः ।
मनोरथः सिद्धिमिव क्षणेन
रथस्तदीयः पुरमाससाद ॥
तां कुण्डिनाख्यापदमात्रगुप्ताम्
इन्द्रस्य भूमेरमरावतीं सः ।
मनोरथः सिद्धिमिव क्षणेन
रथस्तदीयः पुरमाससाद ॥
इन्द्रस्य भूमेरमरावतीं सः ।
मनोरथः सिद्धिमिव क्षणेन
रथस्तदीयः पुरमाससाद ॥
अन्वयः
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सः तदीयः रथः, मनोरथः सिद्धिम् इव, कुण्डिन-आख्या-पद-मात्र-गुप्ताम् इन्द्रस्य भूमेः अमरावतीम् ताम् पुरम् क्षणेन आससाद ।
Summary
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His (Nala's) chariot reached that city in a moment, just as a wish reaches its fulfillment. The city was like Amaravati, the capital of Indra, concealed only by the name 'Kundina'.
पदच्छेदः
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| ताम् | तद् (२.१) | that |
| कुण्डिनाख्यापदमात्रगुप्ताम् | कुण्डिन–आख्या–पद–मात्र–गुप्ताम् (२.१) | concealed only by the name 'Kundina' |
| इन्द्रस्य | इन्द्र (६.१) | of Indra |
| भूमेः | भूमि (६.१) | of the land |
| अमरावतीम् | अमरावती (२.१) | Amaravati |
| सः | तद् (१.१) | that |
| मनोरथः | मनोरथ (१.१) | a wish |
| सिद्धिम् | सिद्धि (२.१) | fulfillment |
| इव | इव | like |
| क्षणेन | क्षण (३.१) | in a moment |
| रथः | रथ (१.१) | chariot |
| तदीयः | तदीय (१.१) | his |
| पुरम् | पुर (२.१) | city |
| आससाद | आससाद (आ√सद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reached |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | कु | ण्डि | ना | ख्या | प | द | मा | त्र | गु | प्ता |
| मि | न्द्र | स्य | भू | मे | र | म | रा | व | तीं | सः |
| म | नो | र | थः | सि | द्धि | मि | व | क्ष | णे | न |
| र | थ | स्त | दी | यः | पु | र | मा | स | सा | द |
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