पश्याः पुरंघ्रीः प्रति सान्द्रचन्द्र-
रजःकृतक्रीडकुमारचक्रे ।
चित्राणि चक्रेऽध्वनि चक्रवर्ति-
चिह्नं तदङ्घ्रिप्रतिमासु चक्रम् ॥
पश्याः पुरंघ्रीः प्रति सान्द्रचन्द्र-
रजःकृतक्रीडकुमारचक्रे ।
चित्राणि चक्रेऽध्वनि चक्रवर्ति-
चिह्नं तदङ्घ्रिप्रतिमासु चक्रम् ॥
रजःकृतक्रीडकुमारचक्रे ।
चित्राणि चक्रेऽध्वनि चक्रवर्ति-
चिह्नं तदङ्घ्रिप्रतिमासु चक्रम् ॥
अन्वयः
AI
सान्द्र-चन्द्र-रजः-कृत-क्रीड-कुमार-चक्रे अध्वनि पश्याः पुरंघ्रीः प्रति सः तत्-अङ्घ्रि-प्रतिमासु चक्रवर्ति-चिह्नम् चक्रम् (आलिख्य) चित्राणि चक्रे ।
Summary
AI
On a path where boys were playing with wheels made of thick camphor powder, he (Nala) created wonders for the watching city women by drawing the discus, the sign of an emperor, in the impressions of his own feet.
पदच्छेदः
AI
| पश्याः | पश्य (२.३) | the watching |
| पुरंघ्रीः | पुरंध्रि (२.३) | city women |
| प्रति | प्रति | towards |
| सान्द्र | सान्द्र | thick |
| चन्द्र | चन्द्र | moon |
| रजः | रजस् | dust (camphor) |
| कृत | कृत (√कृ+क्त) | made |
| क्रीड | क्रीड | play |
| कुमार | कुमार | boys |
| चक्रे | चक्र (७.१) | where there were wheels for |
| चित्राणि | चित्र (२.३) | wonders |
| चक्रे | चक्रे (√कृ कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he made |
| अध्वनि | अध्वन् (७.१) | on the path |
| चक्रवर्ति | चक्रवर्तिन् | emperor's |
| चिह्नम् | चिह्न (२.१) | the mark |
| तत् | तद् | his |
| अङ्घ्रि | अङ्घ्रि | foot |
| प्रतिमासु | प्रतिमा (७.३) | in the impressions of |
| चक्रम् | चक्र (२.१) | the wheel (discus) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | श्याः | पु | रं | घ्रीः | प्र | ति | सा | न्द्र | च | न्द्र |
| र | जः | कृ | त | क्री | ड | कु | मा | र | च | क्रे |
| चि | त्रा | णि | च | क्रे | ऽध्व | नि | च | क्र | व | र्ति |
| चि | ह्नं | त | द | ङ्घ्रि | प्र | ति | मा | सु | च | क्रम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.