उल्लास्यतां स्पृष्टनलाङ्गमङ्गं
तासां नलच्छायपिबाऽपि दृष्टिः ।
अश्मैव रत्यास्तदनर्ति पत्या
छेदेऽप्यबोधं यदहर्षि लोम ॥
उल्लास्यतां स्पृष्टनलाङ्गमङ्गं
तासां नलच्छायपिबाऽपि दृष्टिः ।
अश्मैव रत्यास्तदनर्ति पत्या
छेदेऽप्यबोधं यदहर्षि लोम ॥
तासां नलच्छायपिबाऽपि दृष्टिः ।
अश्मैव रत्यास्तदनर्ति पत्या
छेदेऽप्यबोधं यदहर्षि लोम ॥
अन्वयः
AI
तासाम् स्पृष्ट-नल-अङ्गम् अङ्गम् उल्लास्यताम् । नल-छाय-पिबा दृष्टिः अपि (उल्लास्यताम्) । यत् लोम अहर्षि, तत् पत्या छेदे अपि अबोधम् रत्याः अश्मा इव अनर्ति ।
Summary
AI
Let their bodies, which touched Nala's body, rejoice, and also their gaze, which drank in Nala's shadow. The body hair that bristled with joy danced like the stone-form of Rati, which remained unconscious even when her husband (Cupid) was destroyed.
पदच्छेदः
AI
| उल्लास्यताम् | उल्लास्यताम् (उद्√लस् +णिच्+यक् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be made to rejoice |
| स्पृष्ट | स्पृष्ट (√स्पृश्+क्त) | touched |
| नल | नल | Nala's |
| अङ्गम् | अङ्ग (२.१) | body |
| अङ्गम् | अङ्ग (१.१) | the body |
| तासाम् | तद् (६.३) | of them |
| नल | नल | Nala's |
| छाय | छाया | shadow |
| पिबा | पिब (√पा, १.१) | drinking |
| अपि | अपि | also |
| दृष्टिः | दृष्टि (१.१) | the gaze |
| अश्मा | अश्मन् (१.१) | a stone |
| इव | इव | like |
| रत्याः | रति (६.१) | of Rati |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| अनर्ति | अनर्ति (√नृत् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | danced |
| पत्या | पति (३.१) | by her husband |
| छेदे | छेद (७.१) | at the destruction |
| अपि | अपि | even |
| अबोधम् | अबोध (१.१) | unconscious |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| अहर्षि | अहर्षि (√हृष् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | bristled |
| लोम | लोमन् (१.१) | body hair |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | ल्ला | स्य | तां | स्पृ | ष्ट | न | ला | ङ्ग | म | ङ्गं |
| ता | सां | न | ल | च्छा | य | पि | बा | ऽपि | दृ | ष्टिः |
| अ | श्मै | व | र | त्या | स्त | द | न | र्ति | प | त्या |
| छे | दे | ऽप्य | बो | धं | य | द | ह | र्षि | लो | म |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.