तस्माददृश्यादपि नातिबिभ्युः
तच्छायरूपाहितमोहलोलाः ।
मन्यन्त एवादृतमन्मथाज्ञाः
प्राणानपि स्वान्सुदृशस्तृणानि ॥
तस्माददृश्यादपि नातिबिभ्युः
तच्छायरूपाहितमोहलोलाः ।
मन्यन्त एवादृतमन्मथाज्ञाः
प्राणानपि स्वान्सुदृशस्तृणानि ॥
तच्छायरूपाहितमोहलोलाः ।
मन्यन्त एवादृतमन्मथाज्ञाः
प्राणानपि स्वान्सुदृशस्तृणानि ॥
अन्वयः
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तत्-छाय-रूप-आहित-मोह-लोलाः आदृत-मन्मथ-आज्ञाः सुदृशः तस्मात् अदृश्यात् अपि न अतिबिभ्युः, स्वान् प्राणान् अपि तृणानि एव मन्यन्ते ।
Summary
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The beautiful-eyed women, bewildered and agitated by the charm of his shadow-form and obeying Cupid's commands, did not fear him much even though he was invisible. Indeed, they regarded even their own lives as mere blades of grass.
पदच्छेदः
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| तस्मात् | तद् (५.१) | from that |
| अदृश्यात् | अदृश्य (५.१) | from the invisible one |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| अतिबिभ्युः | बिभ्युः (अति√भी कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | did fear much |
| तत् | तद् | his |
| छाय | छाया | shadow |
| रूप | रूप | form |
| आहित | आहित (आ√धा+क्त) | caused |
| मोह | मोह | bewilderment |
| लोलाः | लोल (१.३) | agitated by |
| मन्यन्ते | मन्यन्ते (√मन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they consider |
| एव | एव | indeed |
| आदृत | आदृत (आ√दृ+क्त) | honored |
| मन्मथ | मन्मथ | Cupid's |
| आज्ञाः | आज्ञा (१.३) | whose commands |
| प्राणान् | प्राण (२.३) | lives |
| अपि | अपि | even |
| स्वान् | स्व (२.३) | their own |
| सुदृशः | सुदृश् (१.३) | the beautiful-eyed women |
| तृणानि | तृण (२.३) | as blades of grass |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मा | द | दृ | श्या | द | पि | ना | ति | बि | भ्युः |
| त | च्छा | य | रू | पा | हि | त | मो | ह | लो | लाः |
| म | न्य | न्त | ए | वा | दृ | त | म | न्म | था | ज्ञाः |
| प्रा | णा | न | पि | स्वा | न्सु | दृ | श | स्तृ | णा | नि |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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