दोर्मूलमालोक्य कचं रुरुत्सोः
ततः कुचौ तावनुलेपयन्त्याः ।
नाभीमथैष श्लथवाससोऽनु
मिमील दिक्षु क्रमकृष्टचक्षुः ॥
दोर्मूलमालोक्य कचं रुरुत्सोः
ततः कुचौ तावनुलेपयन्त्याः ।
नाभीमथैष श्लथवाससोऽनु
मिमील दिक्षु क्रमकृष्टचक्षुः ॥
ततः कुचौ तावनुलेपयन्त्याः ।
नाभीमथैष श्लथवाससोऽनु
मिमील दिक्षु क्रमकृष्टचक्षुः ॥
अन्वयः
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एषः क्रमकृष्टचक्षुः (सन्) कचम् रुरुत्सोः दोर्मूलम् आलोक्य, ततः तौ कुचौ अनुलेपयन्त्याः (आलोक्य), अथ श्लथवाससः नाभीम् अनु (आलोक्य) दिक्षु मिमील।
Summary
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His eyes drawn sequentially, he first saw the armpit of a woman wishing to tie her hair, then the breasts of one anointing them, and then the navel of one whose garment was loose; after seeing these, he closed his eyes.
पदच्छेदः
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| दोर्मूलम् | दोस्–मूल (२.१) | the armpit |
| आलोक्य | आलोक्य (आ√लोक्+ल्यप्) | having seen |
| कचम् | कच (२.१) | hair |
| रुरुत्सोः | रुरुत्सु (√रुध्+सन्+उ, ६.१) | of her who wished to tie up |
| ततः | ततः | then |
| कुचौ | कुच (२.२) | the two breasts |
| तौ | तद् (२.२) | those two |
| अनुलेपयन्त्याः | अनुलेपयन्ती (अनु√लिप्+णिच्+शतृ, ६.१) | of her who was anointing |
| नाभीम् | नाभि (२.१) | the navel |
| अथ | अथ | then |
| एषः | एतद् (१.१) | he |
| श्लथवाससः | श्लथ–वासस् (६.१) | of her whose garment was loose |
| अनु | अनु | after |
| मिमील | मिमील (√मील् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | closed (his eyes) |
| दिक्षु | दिश् (७.३) | in the directions |
| क्रमकृष्टचक्षुः | क्रम–कृष्ट–चक्षुस् (१.१) | he whose eyes were drawn sequentially |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दो | र्मू | ल | मा | लो | क्य | क | चं | रु | रु | त्सोः |
| त | तः | कु | चौ | ता | व | नु | ले | प | य | न्त्याः |
| ना | भी | म | थै | ष | श्ल | थ | वा | स | सो | ऽनु |
| मि | मी | ल | दि | क्षु | क्र | म | कृ | ष्ट | च | क्षुः |
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