पश्यन्स तस्मिन्मरुतापि तन्व्याः
स्तनौ परिस्प्रष्टुमिवास्तवस्त्रौ ।
अक्षान्तपक्षान्तमृगाङ्कमास्यं
दधार तिर्यग्वलितं विलक्षः ॥
पश्यन्स तस्मिन्मरुतापि तन्व्याः
स्तनौ परिस्प्रष्टुमिवास्तवस्त्रौ ।
अक्षान्तपक्षान्तमृगाङ्कमास्यं
दधार तिर्यग्वलितं विलक्षः ॥
स्तनौ परिस्प्रष्टुमिवास्तवस्त्रौ ।
अक्षान्तपक्षान्तमृगाङ्कमास्यं
दधार तिर्यग्वलितं विलक्षः ॥
अन्वयः
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तस्मिन् विलक्षः सः मरुता अपि परिस्प्रष्टुम् इव आस्तव्यस्तौ तन्व्याः स्तनौ पश्यन्, अक्षान्तपक्षान्तमृगाङ्कम् आस्यम् तिर्यक् वलितम् दधार।
Summary
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In that situation, the embarrassed Nala, seeing the slender woman's breasts dishevelled as if to be touched even by the wind, turned his face sideways, which then resembled the faint moon at the end of the dark fortnight.
पदच्छेदः
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| पश्यन् | पश्यत् (√दृश्+शतृ, १.१) | seeing |
| सः | तद् (१.१) | he |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that situation |
| मरुता | मरुत् (३.१) | by the wind |
| अपि | अपि | even |
| तन्व्याः | तन्वी (६.१) | of the slender woman |
| स्तनौ | स्तन (२.२) | the two breasts |
| परिस्प्रष्टुम् | परिस्प्रष्टुम् (परि√स्पृश्+तुमुन्) | to touch |
| इव | इव | as if |
| आस्तव्यस्तौ | आस्तव्यस्त (२.२) | dishevelled |
| अक्षान्तपक्षान्तमृगाङ्कम् | अक्षान्त–पक्षान्त–मृगाङ्क (२.१) | like the faint moon at the end of the dark fortnight |
| आस्यम् | आस्य (२.१) | face |
| दधार | दधार (√धृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | held |
| तिर्यक् | तिर्यक् | sideways |
| वलितम् | वलित (√वल्+क्त, २.१) | turned |
| विलक्षः | विलक्ष (१.१) | embarrassed |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | श्य | न्स | त | स्मि | न्म | रु | ता | पि | त | न्व्याः |
| स्त | नौ | प | रि | स्प्र | ष्टु | मि | वा | स्त | व | स्त्रौ |
| अ | क्षा | न्त | प | क्षा | न्त | मृ | गा | ङ्क | मा | स्यं |
| द | धा | र | ति | र्य | ग्व | लि | तं | वि | ल | क्षः |
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