अनादिसर्गस्रजि वानुभूता
चित्रेषु वा भीमसुता नलेन ।
जातेव यद्वा जितशम्बरस्य
सा शाम्बरीशिल्पमलक्षि दिक्षु ॥
अनादिसर्गस्रजि वानुभूता
चित्रेषु वा भीमसुता नलेन ।
जातेव यद्वा जितशम्बरस्य
सा शाम्बरीशिल्पमलक्षि दिक्षु ॥
चित्रेषु वा भीमसुता नलेन ।
जातेव यद्वा जितशम्बरस्य
सा शाम्बरीशिल्पमलक्षि दिक्षु ॥
अन्वयः
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नलेन अनादिसर्गस्रजि वा अनुभूता, चित्रेषु वा (दृष्टा) भीमसुता, यद्वा जितशम्बरस्य शाम्बरीशिल्पम् इव जाता सा दिक्षु अलक्षि।
Summary
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Damayanti, as if experienced by Nala in the beginningless garland of creation or seen in pictures, or else born as the magical art of the love-god who conquered Shambara, was seen by him in all directions.
पदच्छेदः
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| अनादिसर्गस्रजि | अनादि–सर्ग–स्रज् (७.१) | in the garland of beginningless creation |
| वा | वा | or |
| अनुभूता | अनुभूत (अनु√भू+क्त+टाप्, १.१) | experienced |
| चित्रेषु | चित्र (७.३) | in pictures |
| वा | वा | or |
| भीमसुता | भीम–सुता (१.१) | Bhima's daughter (Damayanti) |
| नलेन | नल (३.१) | by Nala |
| जाता | जात (√जन्+क्त+टाप्, १.१) | born |
| इव | इव | as if |
| यद्वा | यद्वा | or else |
| जितशम्बरस्य | जित–शम्बर (६.१) | of the one who conquered Shambara (Kama) |
| सा | तद् (१.१) | that |
| शाम्बरीशिल्पम् | शाम्बरी–शिल्प (१.१) | magical art |
| अलक्षि | अलक्षि (√लक्ष् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| दिक्षु | दिश् (७.३) | in all directions |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ना | दि | स | र्ग | स्र | जि | वा | नु | भू | ता |
| चि | त्रे | षु | वा | भी | म | सु | ता | न | ले | न |
| जा | ते | व | य | द्वा | जि | त | श | म्ब | र | स्य |
| सा | शा | म्ब | री | शि | ल्प | म | ल | क्षि | दि | क्षु |
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