अन्तःपुरान्तः स विलोक्य बालां
कांचित्समालब्धुमसंवृतोरुम् ।
निमीलिताक्षः परया भ्रमन्त्या
संघट्टमासाद्य चमच्चकार ॥
अन्तःपुरान्तः स विलोक्य बालां
कांचित्समालब्धुमसंवृतोरुम् ।
निमीलिताक्षः परया भ्रमन्त्या
संघट्टमासाद्य चमच्चकार ॥
कांचित्समालब्धुमसंवृतोरुम् ।
निमीलिताक्षः परया भ्रमन्त्या
संघट्टमासाद्य चमच्चकार ॥
अन्वयः
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सः अन्तःपुरान्तः असंवृतोरुम् काञ्चित् बालाम् समालब्धुम् विलोक्य, निमीलिताक्षः (सन्) परया भ्रमन्त्या (बालया) संघट्टम् आसाद्य चमच्चकार।
Summary
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Inside the inner apartments, upon seeing a certain young woman with uncovered thighs about to be touched, he (Nala) closed his eyes. While wandering thus, he collided with another woman and was startled.
पदच्छेदः
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| अन्तःपुरान्तः | अन्तःपुरान्तर् | inside the inner apartments |
| सः | तद् (१.१) | he |
| विलोक्य | विलोक्य (वि√लोक्+ल्यप्) | having seen |
| बालाम् | बाला (२.१) | a young woman |
| काञ्चित् | किञ्चित् (२.१) | a certain |
| समालब्धुम् | समालब्धुम् (सम्+आ√लभ्+तुमुन्) | to touch |
| असंर्वृतोरुम् | अ–संवृत–ऊरु (२.१) | whose thighs were uncovered |
| निमीलिताक्षः | निमीलित–अक्षि (१.१) | with eyes closed |
| परया | परा (३.१) | by another |
| भ्रमन्त्या | भ्रमन्ती (√भ्रम्+शतृ, ३.१) | wandering |
| संघट्टम् | संघट्ट (२.१) | a collision |
| आसाद्य | आसाद्य (आ√सद्+ल्यप्) | having encountered |
| चमच्चकार | चमच्चकार (√चमच्कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was startled |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न्तः | पु | रा | न्तः | स | वि | लो | क्य | बा | लां |
| कां | चि | त्स | मा | ल | ब्धु | म | सं | वृ | तो | रुम् |
| नि | मी | लि | ता | क्षः | प | र | या | भ्र | म | न्त्या |
| सं | घ | ट्ट | मा | सा | द्य | च | म | च्च | का | र |
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