श्रीहर्षं कविराजराजिमुकुटालंकारहीरः सुतं
श्रीहीरः सुषुवे जितेन्द्रियचयं ममल्लदेवी च यम् ।
षष्ठः खण्डनखण्डतोऽपि सहजात्क्षोदक्षमे तन्महा-
काव्येऽयं व्यगलन्नलस्य चरिते सर्गो निसर्गोज्ज्वलः ॥
श्रीहर्षं कविराजराजिमुकुटालंकारहीरः सुतं
श्रीहीरः सुषुवे जितेन्द्रियचयं ममल्लदेवी च यम् ।
षष्ठः खण्डनखण्डतोऽपि सहजात्क्षोदक्षमे तन्महा-
काव्येऽयं व्यगलन्नलस्य चरिते सर्गो निसर्गोज्ज्वलः ॥
श्रीहीरः सुषुवे जितेन्द्रियचयं ममल्लदेवी च यम् ।
षष्ठः खण्डनखण्डतोऽपि सहजात्क्षोदक्षमे तन्महा-
काव्येऽयं व्यगलन्नलस्य चरिते सर्गो निसर्गोज्ज्वलः ॥
अन्वयः
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कविराजराजिमुकुटालंकारहीरः श्रीहीरः जितेन्द्रियचयं यं सुतं श्रीहर्षं सुषुवे, ममल्लदेवी च (सुषुवे)। क्षोदक्षमे सहजात् खण्डनखण्डतः अपि (गहने) नलस्य चरिते तत् महाकाव्ये निसर्गोज्ज्वलः अयं षष्ठः सर्गः व्यगलत्।
Summary
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Srihira, a diamond adorning the crowns of the assembly of kingly poets, and Mamalladevi gave birth to a son, Sriharsha, who had conquered his senses. In this great epic, the life of Nala, which withstands scrutiny even more than his innate work, the 'Khandanakhandakhadya,' this naturally brilliant sixth canto has now concluded.
पदच्छेदः
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| श्रीहर्षम् | श्रीहर्ष (२.१) | Sriharsha |
| कविराजराजिमुकुटालंकारहीरः | कवि–राजन्–राजि–मुकुट–अलंकार–हीर (१.१) | a diamond adorning the crowns of the assembly of kingly poets |
| सुतम् | सुत (२.१) | the son |
| श्रीहीरः | श्रीहीर (१.१) | Srihira |
| सुषुवे | सुषुवे (√षू कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | gave birth to |
| जितेन्द्रियचयम् | जित (√जि+क्त)–इन्द्रिय–चय (२.१) | one who had conquered the host of senses |
| ममल्लदेवी | ममल्लदेवी (१.१) | Mamalladevi |
| च | च | and |
| यम् | यद् (२.१) | whom |
| षष्ठः | षष्ठ (१.१) | the sixth |
| खण्डनखण्डतः | खण्डनखण्ड (५.१) | than the Khandanakhandakhadya |
| अपि | अपि | even |
| सहजात् | सहज (५.१) | from his natural/innate work |
| क्षोदक्षमे | क्षोदक्षम (७.१) | in that which is capable of deep analysis |
| तत् | तद् | that |
| महाकाव्ये | महाकाव्य (७.१) | in the great epic poem |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| व्यगलत् | व्यगलत् (वि√गल् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | has concluded |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| चरिते | चरित (७.१) | in the life story of |
| सर्गः | सर्ग (१.१) | canto |
| निसर्गोज्ज्वलः | निसर्ग–उज्ज्वल (उद्√ज्वल्+अच्, १.१) | naturally brilliant |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्री | ह | र्षं | क | वि | रा | ज | रा | जि | मु | कु | टा | लं | का | र | ही | रः | सु | तं |
| श्री | ही | रः | सु | षु | वे | जि | ते | न्द्रि | य | च | यं | म | म | ल्ल | दे | वी | च | यम् |
| ष | ष्ठः | ख | ण्ड | न | ख | ण्ड | तो | ऽपि | स | ह | जा | त्क्षो | द | क्ष | मे | त | न्म | हा |
| का | व्ये | ऽयं | व्य | ग | ल | न्न | ल | स्य | च | रि | ते | स | र्गो | नि | स | र्गो | ज्ज्व | लः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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