क्व प्रयास्यसि नलेत्यलमुक्त्वा
यात्रयात्र शुभयाजनि यन्नः ।
तत्तयैव फलसत्वरया त्वं
नाध्वनोऽर्धमिदमागमितः किम् ॥
क्व प्रयास्यसि नलेत्यलमुक्त्वा
यात्रयात्र शुभयाजनि यन्नः ।
तत्तयैव फलसत्वरया त्वं
नाध्वनोऽर्धमिदमागमितः किम् ॥
यात्रयात्र शुभयाजनि यन्नः ।
तत्तयैव फलसत्वरया त्वं
नाध्वनोऽर्धमिदमागमितः किम् ॥
अन्वयः
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नल क्व प्रयास्यसि इति अलम् उक्त्वा । अत्र यत् नः शुभया यात्रया अजनि, तत् तया एव फल-सत्वरया त्वम् इदम् अध्वनः अर्धम् न आगमितः किम्?
Summary
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"O Nala, where are you going? Enough of this talk. Whatever good fortune has befallen us here through this auspicious journey, were you not brought even halfway on this path by that very same haste for its fruit?"
पदच्छेदः
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| क्व | क्व | where |
| प्रयास्यसि | प्रयास्यसि (प्र√या कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are you going |
| नलेति | नल (८.१)–इति | O Nala, thus |
| अलमुक्त्वा | अलम्–उक्त्वा (√वच्+क्त्वा) | enough of saying |
| यात्रयात्र | यात्रा (३.१)–अत्र | by the journey, here |
| शुभयाजनि | शुभा (३.१)–अजनि (√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | by the auspicious, was born |
| यन्नः | यद् (१.१)–अस्मद् (६.३) | what for us |
| तत्तयैव | तद् (१.१)–तद् (३.१)–एव | by that very same |
| फलसत्वरया | फल–सत्वर (३.१) | by the haste for the fruit |
| त्वं | युष्मद् (१.१) | you |
| नाध्वनोऽर्धमिदमागमितः | न–अध्वन् (६.१)–अर्ध (२.१)–इदम् (२.१)–आगमित (आ√गम्+णिच्+क्त, १.१) | not of the path half this were made to come |
| किम् | किम् | what? |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्व | प्र | या | स्य | सि | न | ले | त्य | ल | मु | क्त्वा |
| या | त्र | या | त्र | शु | भ | या | ज | नि | य | न्नः |
| त | त्त | यै | व | फ | ल | स | त्व | र | या | त्वं |
| ना | ध्व | नो | ऽर्ध | मि | द | मा | ग | मि | तः | किम् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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