नैषधे बत वृते दमयन्त्या
व्रीडितो नहि बहिर्भवितास्मि ।
स्वां गृहेऽपि वनितां कथमास्यं
ह्रीनिमीलि खलु दर्शयिताहे ॥
नैषधे बत वृते दमयन्त्या
व्रीडितो नहि बहिर्भवितास्मि ।
स्वां गृहेऽपि वनितां कथमास्यं
ह्रीनिमीलि खलु दर्शयिताहे ॥
व्रीडितो नहि बहिर्भवितास्मि ।
स्वां गृहेऽपि वनितां कथमास्यं
ह्रीनिमीलि खलु दर्शयिताहे ॥
अन्वयः
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बत दमयन्त्या नैषधे वृते (सति) व्रीडितः (अहम्) नहि बहिः भविता अस्मि । खलु गृहे अपि स्वाम् वनिताम् ह्री-निमीलि आस्यम् कथम् दर्शयिता अहे ।
Summary
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(Indra thinks) "Alas, if Damayanti chooses Nala, I, being ashamed, will not be able to go out. Indeed, how will I show my face, closed with shame, even to my own wife at home?"
पदच्छेदः
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| नैषधे | नैषध (७.१) | Nala |
| बत | बत | alas |
| वृते | वृत (√वृ+क्त, ७.१) | being chosen |
| दमयन्त्या | दमयन्ती (३.१) | by Damayanti |
| व्रीडितः | व्रीडित (√व्रीड्+क्त, १.१) | ashamed |
| नहि | नहि | not indeed |
| बहिः | बहिस् | outside |
| भवितास्मि | भवितृ (√भू+तृच्, १.१)–अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will be |
| स्वाम् | स्व (२.१) | own |
| गृहे | गृह (७.१) | at home |
| अपि | अपि | even |
| वनिताम् | वनिता (२.१) | to wife |
| कथम् | कथम् | how |
| आस्यम् | आस्य (२.१) | face |
| ह्रीनिमीलि | ह्री–निमीलित (नि√मील्+क्त, २.१) | closed with shame |
| खलु | खलु | indeed |
| दर्शयिताहे | दर्शयिताहे (√दृश् +णिच् कर्तरि लुट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will show |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नै | ष | धे | ब | त | वृ | ते | द | म | य | न्त्या |
| व्री | डि | तो | न | हि | ब | हि | र्भ | वि | ता | स्मि |
| स्वां | गृ | हे | ऽपि | व | नि | तां | क | थ | मा | स्यं |
| ह्री | नि | मी | लि | ख | लु | द | र्श | यि | ता | हे |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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