पर्यभूद्दिनमणिर्द्विजराजं
यत्करैरहह तेन तदा तम् ।
पर्यभूत्खलु करैर्द्विजराजः
कर्म कः स्वकृतमत्र न भुङ्क्ते ॥
पर्यभूद्दिनमणिर्द्विजराजं
यत्करैरहह तेन तदा तम् ।
पर्यभूत्खलु करैर्द्विजराजः
कर्म कः स्वकृतमत्र न भुङ्क्ते ॥
यत्करैरहह तेन तदा तम् ।
पर्यभूत्खलु करैर्द्विजराजः
कर्म कः स्वकृतमत्र न भुङ्क्ते ॥
अन्वयः
AI
अहह ! यत् दिनमणिः करैः द्विजराजम् (चन्द्रम्) पर्यभूत्, तेन (कर्मणा) तदा तम् (दिनमणिम्) द्विजराजः (नारदः) करैः (तेजसा) खलु पर्यभूत् । अत्र कः स्वकृतम् कर्म न भुङ्क्ते ?
Summary
AI
Alas! Just as the sun (the jewel of the day) overpowers the moon (the king of the twice-born) with its rays, so too was that sun then overpowered by the rays (splendor) of Narada (the king of the twice-born). Who in this world does not experience the consequences of their own actions?
पदच्छेदः
AI
| पर्यभूत् | पर्यभूत् (परि√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | overpowered |
| दिनमणिः | दिनमणि (१.१) | the jewel of the day (sun) |
| द्विजराजम् | द्विजराज (२.१) | the king of the twice-born (moon) |
| यत् | यद् | since/as |
| करैः | कर (३.३) | with rays |
| अहह | अहह | Alas! |
| तेन | तद् (३.१) | by that (action) |
| तदा | तदा | then |
| तम् | तद् (२.१) | him (the sun) |
| पर्यभूत् | पर्यभूत् (परि√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | overpowered |
| खलु | खलु | indeed |
| करैः | कर (३.३) | with rays (of splendor) |
| द्विजराजः | द्विजराज (१.१) | the king of the twice-born (Narada) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) | action |
| कः | किम् (१.१) | who |
| स्वकृतम् | स्वकृत (२.१) | done by oneself |
| अत्र | अत्र | here |
| न | न | not |
| भुङ्क्ते | भुङ्क्ते (√भुज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | experiences/enjoys |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र्य | भू | द्दि | न | म | णि | र्द्वि | ज | रा | जं |
| य | त्क | रै | र | ह | ह | ते | न | त | दा | तम् |
| प | र्य | भू | त्ख | लु | क | रै | र्द्वि | ज | रा | जः |
| क | र्म | कः | स्व | कृ | त | म | त्र | न | भु | ङ्क्ते |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.