चित्रमत्र विबुधैरपि
यत्तैः स्वर्विहाय बत भूरनुसस्रे ।
द्यौर्न काचिदथवास्ति
निरुढा सैव सा चलति यत्र हि चित्तम् ॥
चित्रमत्र विबुधैरपि
यत्तैः स्वर्विहाय बत भूरनुसस्रे ।
द्यौर्न काचिदथवास्ति
निरुढा सैव सा चलति यत्र हि चित्तम् ॥
यत्तैः स्वर्विहाय बत भूरनुसस्रे ।
द्यौर्न काचिदथवास्ति
निरुढा सैव सा चलति यत्र हि चित्तम् ॥
अन्वयः
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अत्र चित्रम् यत् तैः विबुधैः अपि स्वः विहाय भूः अनुसस्रे, बत। अथवा काचित् निरुढा द्यौः न अस्ति। यत्र हि चित्तम् चलति, सा एव सा (द्यौः)।
Summary
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It is strange that even the gods, leaving heaven, followed the path to earth. Or rather, there is no fixed heaven; indeed, heaven is that very place where the mind goes.
पदच्छेदः
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| चित्रम् | चित्र (१.१) | it is strange |
| अत्र | अत्र | here |
| विबुधैः | विबुध (३.३) | by the gods |
| अपि | अपि | even |
| यत् | यद् | that |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| स्वः | स्वर् (२.१) | heaven |
| विहाय | विहाय (वि√हा+ल्यप्) | having left |
| बत | बत | alas |
| भूः | भू (१.१) | the earth |
| अनुसस्रे | अनुसस्रे (अनु√सृ भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was followed |
| द्यौः | द्यो (१.१) | heaven |
| न | न | not |
| काचित् | काचित् (१.१) | any |
| अथवा | अथवा | or rather |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| निरुढा | निरुढ (निर्√वह्+क्त, १.१) | fixed |
| सैव | सा एव (१.१) | that very one |
| सा | तद् (१.१) | she (heaven) |
| चलति | चलति (√चल् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | moves |
| यत्र | यत्र | where |
| हि | हि | indeed |
| चित्तम् | चित्त (१.१) | the mind |
छन्दः
आर्यागीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चि | त्र | म | त्र | वि | बु | धै | र | पि | |||||
| य | त्तैः | स्व | र्वि | हा | य | ब | त | भू | र | नु | स | स्रे | |
| द्यौ | र्न | का | चि | द | थ | वा | स्ति | ||||||
| नि | रु | ढा | सै | व | सा | च | ल | ति | य | त्र | हि | चि | त्तम् |
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