प्रेषिताः पृथगथो दमयन्त्यै
चित्तचौर्यचतुरा निजदूत्यः ।
तद्गुरुं प्रति च तैरुपहाराः
संख्यसौख्यकपटेन निगूढाः ॥
प्रेषिताः पृथगथो दमयन्त्यै
चित्तचौर्यचतुरा निजदूत्यः ।
तद्गुरुं प्रति च तैरुपहाराः
संख्यसौख्यकपटेन निगूढाः ॥
चित्तचौर्यचतुरा निजदूत्यः ।
तद्गुरुं प्रति च तैरुपहाराः
संख्यसौख्यकपटेन निगूढाः ॥
अन्वयः
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अथो तैः चित्तचौर्यचतुराः निजदूत्यः दमयन्त्यै पृथक् प्रेषिताः। च संख्यसौख्यकपटेन निगूढाः उपहाराः तद्गुरुम् प्रति (प्रेषिताः)।
Summary
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Then, their own female messengers, skilled in stealing hearts, were sent separately by them to Damayanti. And gifts, concealed under the pretext of friendship and goodwill, were sent to her father.
पदच्छेदः
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| प्रेषिताः | प्रेषित (प्र√इष्+क्त, १.३) | were sent |
| पृथक् | पृथक् | separately |
| अथो | अथो | then |
| दमयन्त्यै | दमयन्ती (४.१) | for Damayanti |
| चित्तचौर्यचतुराः | चित्त–चौर्य–चतुर (१.३) | skilled in stealing the heart |
| निजदूत्यः | निज–दूती (१.३) | their own female messengers |
| तद्गुरुम् | तत्–गुरु (२.१) | her father |
| प्रति | प्रति | towards |
| च | च | and |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| उपहाराः | उपहार (१.३) | gifts |
| संख्यसौख्यकपटेन | संख्य–सौख्य–कपट (३.१) | under the pretext of friendship and goodwill |
| निगूढाः | निगूढ (नि√गुह्+क्त, १.३) | concealed |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रे | षि | ताः | पृ | थ | ग | थो | द | म | य | न्त्यै |
| चि | त्त | चौ | र्य | च | तु | रा | नि | ज | दू | त्यः |
| त | द्गु | रुं | प्र | ति | च | तै | रु | प | हा | राः |
| सं | ख्य | सौ | ख्य | क | प | टे | न | नि | गू | ढाः |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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