इत्युदीर्य स ययौ मुनिरुर्वो
स्वर्पतिं प्रतिनिवर्त्य बलेन ।
वारितोऽप्यनुजगाम सयत्नं
तं कियन्त्यपि पदान्यपराणि ॥
इत्युदीर्य स ययौ मुनिरुर्वो
स्वर्पतिं प्रतिनिवर्त्य बलेन ।
वारितोऽप्यनुजगाम सयत्नं
तं कियन्त्यपि पदान्यपराणि ॥
स्वर्पतिं प्रतिनिवर्त्य बलेन ।
वारितोऽप्यनुजगाम सयत्नं
तं कियन्त्यपि पदान्यपराणि ॥
अन्वयः
AI
इति उदीर्य सः मुनिः ययौ । उर्व्याः स्वर्पतिम् बलेन प्रतिनिवर्त्य, वारितः अपि (सः) तम् अपराणि कियन्ति अपि पदानि स-यत्नम् अनुजगाम ।
Summary
AI
Having spoken thus, the sage (Narada) departed. The lord of heaven (Indra), turning him back from the earth by force, though prevented, still diligently followed him for some more steps.
पदच्छेदः
AI
| इति | इति | thus |
| उदीर्य | उदीर्य (उद्√ईर्+ल्यप्) | having spoken |
| सः | तद् (१.१) | he |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went |
| मुनिः | मुनि (१.१) | the sage |
| उर्व्याः | उर्वी (६.१) | of the earth |
| स्वर्पतिम् | स्वर्पति (२.१) | the lord of heaven |
| प्रतिनिवर्त्य | प्रतिनिवर्त्य (प्रति+नि√वृत्+णिच्+ल्यप्) | turning back |
| बलेन | बल (३.१) | by force |
| वारितः | वारित (√वृ+णिच्+क्त, १.१) | prevented |
| अपि | अपि | although |
| अनुजगाम | अनुजगाम (अनु√गम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | followed |
| सयत्नम् | सयत्नम् | diligently |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| कियन्ति | कियत् (२.३) | some |
| अपि | अपि | even |
| पदानि | पद (२.३) | steps |
| अपराणि | अपर (२.३) | more |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्यु | दी | र्य | स | य | यौ | मु | नि | रु | र्वो |
| स्व | र्प | तिं | प्र | ति | नि | व | र्त्य | ब | ले | न |
| वा | रि | तो | ऽप्य | नु | ज | गा | म | स | य | त्नं |
| तं | कि | य | न्त्य | पि | प | दा | न्य | प | रा | णि |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.