स्वारसातलभवाहवशङ्की
निर्वृणोमि न वसन्वसुमत्याम् ।
द्यां गतस्य हृदि मे दुरुदर्कः
क्ष्मातलद्वयभटाजिवितर्कः ॥
स्वारसातलभवाहवशङ्की
निर्वृणोमि न वसन्वसुमत्याम् ।
द्यां गतस्य हृदि मे दुरुदर्कः
क्ष्मातलद्वयभटाजिवितर्कः ॥
निर्वृणोमि न वसन्वसुमत्याम् ।
द्यां गतस्य हृदि मे दुरुदर्कः
क्ष्मातलद्वयभटाजिवितर्कः ॥
अन्वयः
AI
स्वः-रसातल-भव-आहव-शङ्की (अहम्) वसुमतीम् वसन् न निर्वृणोमि । द्याम् गतस्य मे हृदि दुरुदर्कः क्ष्मातल-द्वय-भट-आजि-वितर्कः (वर्तते) ।
Summary
AI
"Fearing a battle between the denizens of heaven and the netherworld, I find no peace dwelling on earth. Having come to heaven, the dreadful thought of a war between the warriors of both realms (heaven and earth) weighs on my heart."
पदच्छेदः
AI
| स्वः | स्वर् | of heaven |
| रसातल | रसातल | and the netherworld |
| भव | भव | denizens' |
| आहव | आहव | battle |
| शङ्की | शङ्किन् (१.१) | fearing |
| निर्वृणोमि | निर्वृणोमि (निर्√वृ कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I find peace |
| न | न | not |
| वसन् | वसन्त् (√वस्+शतृ, १.१) | dwelling |
| वसुमतीम् | वसुमती (२.१) | on the earth |
| द्याम् | दिव् (२.१) | to heaven |
| गतस्य | गत (√गम्+क्त, ६.१) | of one who has gone |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| दुरुदर्कः | दुरुदर्क (१.१) | dreadful |
| क्ष्मातल | क्ष्मातल | of the earth |
| द्वय | द्वय | two |
| भट | भट | warriors' |
| आजि | आजि | battle |
| वितर्कः | वितर्क (१.१) | thought |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्वा | र | सा | त | ल | भ | वा | ह | व | श | ङ्की |
| नि | र्वृ | णो | मि | न | व | स | न्व | सु | म | त्याम् |
| द्यां | ग | त | स्य | हृ | दि | मे | दु | रु | द | र्कः |
| क्ष्मा | त | ल | द्व | य | भ | टा | जि | वि | त | र्कः |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.