संख्यविक्षततनुस्रवदस्र-
क्षालिताखिलनिजाघलघूनाम् ।
यत्त्विहानुपगमः शृणु राज्ञां
तज्जगद्युवमुदं तमुदन्तम् ॥
संख्यविक्षततनुस्रवदस्र-
क्षालिताखिलनिजाघलघूनाम् ।
यत्त्विहानुपगमः शृणु राज्ञां
तज्जगद्युवमुदं तमुदन्तम् ॥
क्षालिताखिलनिजाघलघूनाम् ।
यत्त्विहानुपगमः शृणु राज्ञां
तज्जगद्युवमुदं तमुदन्तम् ॥
अन्वयः
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तु संख्य-विक्षत-तनु-स्रवत्-अस्र-क्षालित-अखिल-निज-अघ-लघूनां राज्ञाम् इह यत् अनुपगमः अस्ति, तत् जगत्-युव-मुदं तम् उदन्तं शृणु।
Summary
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'But as for the non-arrival here of those kings—who are lightened of all their sins, washed away by the blood flowing from their bodies wounded in battle—listen to that news, which is a source of joy to the youth of the world.'
पदच्छेदः
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| संख्यविक्षततनुस्रवदस्रक्षालिताखिलनिजाघलघूनाम् | संख्य–विक्षत (वि√क्षन्+क्त)–तनु–स्रवत् (√स्रु+शतृ)–अस्र–क्षालित (√क्षाल्+क्त)–अखिल–निज–अघ–लघु (६.३) | of those lightened of all their sins, washed away by blood flowing from bodies wounded in battle |
| यत् | यद् | as for |
| तु | तु | but |
| इह | इह | here |
| अनुपगमः | अनुपगम (१.१) | non-arrival |
| शृणु | शृणु (√श्रु कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | listen |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of the kings |
| तत् | तद् | therefore |
| जगद्युवमुदम् | जगत्–युवन्–मुद् (२.१) | which is a joy to the youth of the world |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| उदन्तम् | उदन्त (२.१) | news |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | ख्य | वि | क्ष | त | त | नु | स्र | व | द | स्र |
| क्षा | लि | ता | खि | ल | नि | जा | घ | ल | घू | नाम् |
| य | त्त्वि | हा | नु | प | ग | मः | शृ | णु | रा | ज्ञां |
| त | ज्ज | ग | द्यु | व | मु | दं | त | मु | द | न्तम् |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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