प्रागिव प्रसुवते नृपवंशाः
किंनु संप्रति न वीरकरीरान् ।
ये परप्रहरणैः परिणामे
विक्षताः क्षितितले निपतन्ति ॥
प्रागिव प्रसुवते नृपवंशाः
किंनु संप्रति न वीरकरीरान् ।
ये परप्रहरणैः परिणामे
विक्षताः क्षितितले निपतन्ति ॥
किंनु संप्रति न वीरकरीरान् ।
ये परप्रहरणैः परिणामे
विक्षताः क्षितितले निपतन्ति ॥
अन्वयः
AI
सम्प्रति नृप-वंशाः प्राक् इव वीर-करीरान् किं नु न प्रसुवते? ये परिणामे पर-प्रहरणैः विक्षताः सन्तः क्षिति-तले निपतन्ति।
Summary
AI
'Do the royal lineages nowadays not produce heroic offspring as they did before? Those who, in the end, wounded by enemy weapons, fall upon the surface of the earth (and thus attain heaven)?'
पदच्छेदः
AI
| प्राक् | प्राञ्च् | formerly |
| इव | इव | like |
| प्रसुवते | प्रसुवते (प्र√सू कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | do they produce |
| नृपवंशाः | नृप–वंश (१.३) | royal lineages |
| किम् | किम् | what |
| नु | नु | indeed |
| संप्रति | संप्रति | nowadays |
| न | न | not |
| वीरकरीरान् | वीर–करीर (२.३) | sprouts of heroes |
| ये | यद् (१.३) | who |
| परप्रहरणैः | पर–प्रहरण (३.३) | by the weapons of enemies |
| परिणामे | परिणाम (७.१) | in the end |
| विक्षताः | विक्षत (वि√क्षन्+क्त, १.३) | wounded |
| क्षितितले | क्षिति–तल (७.१) | on the surface of the earth |
| निपतन्ति | निपतन्ति (नि√पत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fall down |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | गि | व | प्र | सु | व | ते | नृ | प | वं | शाः |
| किं | नु | सं | प्र | ति | न | वी | र | क | री | रान् |
| ये | प | र | प्र | ह | र | णैः | प | रि | णा | मे |
| वि | क्ष | ताः | क्षि | ति | त | ले | नि | प | त | न्ति |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.