यं प्रासूत सहस्रपादुदभवत्पादेन खञ्जः कथं
स च्छायातनयः सुतः किल पितुः सादृश्यमन्विच्छति ।
एतस्योत्तरमद्य नः समजनि त्वत्तेजसां लङ्घने
साहस्रैरपि पङ्गुरङ्घ्रिभिरभिव्यक्तीभवन्भानुमान् ॥
यं प्रासूत सहस्रपादुदभवत्पादेन खञ्जः कथं
स च्छायातनयः सुतः किल पितुः सादृश्यमन्विच्छति ।
एतस्योत्तरमद्य नः समजनि त्वत्तेजसां लङ्घने
साहस्रैरपि पङ्गुरङ्घ्रिभिरभिव्यक्तीभवन्भानुमान् ॥
स च्छायातनयः सुतः किल पितुः सादृश्यमन्विच्छति ।
एतस्योत्तरमद्य नः समजनि त्वत्तेजसां लङ्घने
साहस्रैरपि पङ्गुरङ्घ्रिभिरभिव्यक्तीभवन्भानुमान् ॥
अन्वयः
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सहस्रपात् यम् प्रासूत, सः (शनिः) पादेन खञ्जः कथम् उदभवत्? छायातनयः सुतः किल पितुः सादृश्यम् अन्विच्छति । एतस्य उत्तरम् अद्य नः समजनि । त्वत्-तेजसाम् लङ्घने साहस्रैः अपि अङ्घ्रिभिः पङ्गुः (सन्) भानुमान् अभिव्यक्तीभवन् (अस्ति) ।
Summary
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'How did Shani, born of the thousand-rayed Sun, become lame in one foot? A son is supposed to resemble his father. Today, the answer has become clear to us: the Sun, while attempting to surpass your glory, becomes lame even with his thousands of rays (feet), thus revealing himself.'
पदच्छेदः
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| यम् | यद् (२.१) | whom |
| प्रासूत | प्रासूत (प्र√सू कर्तरि लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | gave birth to |
| सहस्रपात् | सहस्रपाद् (१.१) | the thousand-rayed (Sun) |
| उदभवत् | उदभवत् (उद्√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| पादेन | पाद (३.१) | by one foot |
| खञ्जः | खञ्ज (१.१) | lame |
| कथम् | कथम् | how |
| सः | तद् (१.१) | he |
| च्छायातनयः | छाया–तनय (१.१) | the son of Chhaya (Shani) |
| सुतः | सुत (१.१) | a son |
| किल | किल | indeed |
| पितुः | पितृ (६.१) | of the father |
| सादृश्यम् | सादृश्य (२.१) | resemblance |
| अन्विच्छति | अन्विच्छति (अनु√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | seeks |
| एतस्य | एतद् (६.१) | of this |
| उत्तरम् | उत्तर (१.१) | the answer |
| अद्य | अद्य | today |
| नः | अस्मद् (४.३) | to us |
| समजनि | समजनि (सम्√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | has been born/revealed |
| त्वत्तेजसाम् | त्वद्–तेजस् (६.३) | of your glories |
| लङ्घने | लङ्घन (७.१) | in surpassing |
| साहस्रैः | साहस्र (३.३) | with thousands |
| अपि | अपि | even |
| पङ्गुः | पङ्गु (१.१) | lame |
| अङ्घ्रिभिः | अङ्घ्रि (३.३) | with feet (rays) |
| अभिव्यक्तीभवन् | अभिव्यक्तीभवन्त् (अभिव्यक्ती√भू+शतृ, १.१) | becoming manifest |
| भानुमान् | भानुमत् (१.१) | the Sun |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यं | प्रा | सू | त | स | ह | स्र | पा | दु | द | भ | व | त्पा | दे | न | ख | ञ्जः | क | थं |
| स | च्छा | या | त | न | यः | सु | तः | कि | ल | पि | तुः | सा | दृ | श्य | म | न्वि | च्छ | ति |
| ए | त | स्यो | त्त | र | म | द्य | नः | स | म | ज | नि | त्व | त्ते | ज | सां | ल | ङ्घ | ने |
| सा | ह | स्रै | र | पि | प | ङ्गु | र | ङ्घ्रि | भि | र | भि | व्य | क्ती | भ | व | न्भा | नु | मान् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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