इष्टं न प्रति ते प्रतिश्रुतिरभूद्याद्य स्वराह्लादिनी
धर्मार्था सृज तां श्रुतिप्रतिभटीकृत्यान्विताख्यापदाम् ।
त्वत्कीर्तिः पुनती पुनस्त्रिभुवनं शुभ्राद्वयादेशना-
द्द्रव्याणां शितिपीतलोहितहरिन्नामान्वयं लुम्पतु ॥
इष्टं न प्रति ते प्रतिश्रुतिरभूद्याद्य स्वराह्लादिनी
धर्मार्था सृज तां श्रुतिप्रतिभटीकृत्यान्विताख्यापदाम् ।
त्वत्कीर्तिः पुनती पुनस्त्रिभुवनं शुभ्राद्वयादेशना-
द्द्रव्याणां शितिपीतलोहितहरिन्नामान्वयं लुम्पतु ॥
धर्मार्था सृज तां श्रुतिप्रतिभटीकृत्यान्विताख्यापदाम् ।
त्वत्कीर्तिः पुनती पुनस्त्रिभुवनं शुभ्राद्वयादेशना-
द्द्रव्याणां शितिपीतलोहितहरिन्नामान्वयं लुम्पतु ॥
अन्वयः
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अद्य ते या स्वर-आह्लादिनी धर्म-अर्था प्रतिश्रुतिः इष्टम् प्रति न अभूत्, ताम् श्रुति-प्रतिभटीकृत्य-अन्वित-आख्या-पदाम् सृज । त्वत्-कीर्तिः पुनः त्रिभुवनम् पुनती (सती) शुभ्र-अद्वय-आदेशनात् द्रव्याणाम् शिति-पीत-लोहित-हरित्-नाम-अन्वयम् लुम्पतु ।
Summary
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'Create that promise, which was not made today towards our desired object, a promise that is pleasing to the ear, righteous, and whose words are meaningful and rival the Vedas. May your fame, purifying the three worlds again, by its command of absolute whiteness, erase the association of names like black, yellow, red, and green from all objects.'
पदच्छेदः
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| इष्टम् | इष्ट (√इष्+क्त, २.१) | the desired object |
| न | न | not |
| प्रति | प्रति | towards |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| प्रतिश्रुतिः | प्रतिश्रुति (१.१) | promise |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| या | यद् (१.१) | which |
| अद्य | अद्य | today |
| स्वराह्लादिनी | स्वर–आह्लादिनी (१.१) | pleasing to the ear |
| धर्मार्था | धर्म–अर्था (१.१) | righteous in purpose |
| सृज | सृज (√सृज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | create |
| ताम् | तद् (२.१) | that |
| श्रुतिप्रतिभटीकृत्यान्विताख्यापदाम् | श्रुति–प्रतिभटीकृत्य–अन्वित–आख्या–पदाम् (२.१) | whose words are meaningful and rival the Vedas |
| त्वत्कीर्तिः | त्वद्–कीर्ति (१.१) | your fame |
| पुनती | पुनन्ती (√पू+शतृ+ङीप्, १.१) | purifying |
| पुनः | पुनर् | again |
| त्रिभुवनम् | त्रिभुवन (२.१) | the three worlds |
| शुभ्राद्वयादेशनात् | शुभ्र–अद्वय–आदेशन (५.१) | by its command of absolute whiteness |
| द्रव्याणाम् | द्रव्य (६.३) | of objects |
| शितिपीतलोहितहरिन्नामान्वयम् | शिति–पीत–लोहित–हरित्–नाम–अन्वय (२.१) | the association of names like black, yellow, red, and green |
| लुम्पतु | लुम्पतु (√लुप् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may it erase |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ष्टं | न | प्र | ति | ते | प्र | ति | श्रु | ति | र | भू | द्या | द्य | स्व | रा | ह्ला | दि | नी |
| ध | र्मा | र्था | सृ | ज | तां | श्रु | ति | प्र | ति | भ | टी | कृ | त्या | न्वि | ता | ख्या | प | दाम् |
| त्व | त्की | र्तिः | पु | न | ती | पु | न | स्त्रि | भु | व | नं | शु | भ्रा | द्व | या | दे | श | ना |
| द्द्र | व्या | णां | शि | ति | पी | त | लो | हि | त | ह | रि | न्ना | मा | न्व | यं | लु | म्प | तु |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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