यामिकाननुपमृद्य च मादृ-
क्तां निरीक्षितुमपि क्षमते कः ।
रक्षिलक्षजयचण्डचरित्रे
पुंसि विश्वसिति कुत्र कुमारी ॥
यामिकाननुपमृद्य च मादृ-
क्तां निरीक्षितुमपि क्षमते कः ।
रक्षिलक्षजयचण्डचरित्रे
पुंसि विश्वसिति कुत्र कुमारी ॥
क्तां निरीक्षितुमपि क्षमते कः ।
रक्षिलक्षजयचण्डचरित्रे
पुंसि विश्वसिति कुत्र कुमारी ॥
अन्वयः
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च यामिकान् अनुपमृद्य मादृक् कः ताम् निरीक्षितुम् अपि क्षमते? रक्षिलक्षजयचण्डचरित्रे पुंसि कुमारी कुत्र विश्वसिति?
Summary
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And who like me is able even to see her without overpowering the guards? How can a maiden trust a man whose character is fierce from conquering lakhs of guards?
पदच्छेदः
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| यामिकान् | यामिक (२.३) | the guards |
| अनुपमृद्य | अनुपमृद्य (अनु+प√मृद्+ल्यप्) | without overpowering |
| च | च | And |
| मादृक् | मादृश् (१.१) | one like me |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| निरीक्षितुम् | निरीक्षितुम् (निर्√ईक्ष्+तुमुन्) | to see |
| अपि | अपि | even |
| क्षमते | क्षमते (√क्षम् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is able |
| कः | किम् (१.१) | who |
| रक्षिलक्षजयचण्डचरित्रे | रक्षिन्–लक्ष–जय–चण्ड–चरित्र (७.१) | in a man whose character is fierce from conquering lakhs of guards |
| पुंसि | पुंस् (७.१) | in a man |
| विश्वसिति | विश्वसिति (वि√श्वस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | trusts |
| कुत्र | कुत्र | how |
| कुमारी | कुमारी (१.१) | a maiden |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | मि | का | न | नु | प | मृ | द्य | च | मा | दृ |
| क्तां | नि | री | क्षि | तु | म | पि | क्ष | म | ते | कः |
| र | क्षि | ल | क्ष | ज | य | च | ण्ड | च | रि | त्रे |
| पुं | सि | वि | श्व | सि | ति | कु | त्र | कु | मा | री |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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