उद्भ्रमामि विरहान्मुहु-
रस्या मोहमेमि च मुहूर्तमहं यः
ब्रुत वः प्रभवितास्मि
रहस्यं रक्षितुं स कथमीदृगवस्थ्-
अः
उद्भ्रमामि विरहान्मुहु-
रस्या मोहमेमि च मुहूर्तमहं यः
ब्रुत वः प्रभवितास्मि
रहस्यं रक्षितुं स कथमीदृगवस्थ्-
अः
रस्या मोहमेमि च मुहूर्तमहं यः
ब्रुत वः प्रभवितास्मि
रहस्यं रक्षितुं स कथमीदृगवस्थ्-
अः
अन्वयः
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यः अहम् अस्याः विरहात् मुहुः उद्भ्रमामि, मुहूर्तम् मोहम् एमि च, सः ईदृगवस्थः (अहम्) वः रहस्यम् रक्षितुम् कथम् प्रभविता अस्मि? ब्रूत ।
Summary
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"I, who repeatedly wander distractedly from separation from her and momentarily lose consciousness, how can I, in such a state, be able to keep your secret? Tell me."
पदच्छेदः
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| उद्भ्रमामि | उद्भ्रमामि (उद्√भ्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I wander distractedly |
| विरहात् | विरह (५.१) | from separation |
| मुहुः | मुहुर् | repeatedly |
| अस्याः | इदम् (६.१) | from her |
| मोहम् | मोह (२.१) | unconsciousness |
| एमि | एमि (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I go to |
| च | च | and |
| मुहूर्तम् | मुहूर्त (२.१) | for a moment |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| यः | यद् (१.१) | who |
| ब्रूत | ब्रूत (√ब्रू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | tell me |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
| प्रभविता | प्रभविर्तृ (प्र√भू+तृच्, १.१) | am able |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| रहस्यम् | रहस्य (२.१) | secret |
| रक्षितुम् | रक्षितुम् (√रक्ष्+तुमुन्) | to keep |
| सः | तद् (१.१) | that I |
| कथम् | कथम् | how |
| ईदृगवस्थः | ईदृक्–अवस्थ (१.१) | in such a state |
छन्दः
आर्यागीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | द्भ्र | मा | मि | वि | र | हा | न्मु | हु | ||||
| र | स्या | मो | ह | मे | मि | च | मु | हू | र्त | म | हं | यः |
| ब्रु | त | वः | प्र | भ | वि | ता | स्मि | र | ||||
| ह | स्यं | र | क्षि | तुं | स | क | थ | मी | दृ | ग | व | स्थः |
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