आसते शतमधिक्षिति भूपाः
तोयराशिरसि ते खलु कूपाः ।
किं ग्रहा दिवि न जाग्रति ते ते
भास्करस्य कतमस्तुलयास्ते ॥
आसते शतमधिक्षिति भूपाः
तोयराशिरसि ते खलु कूपाः ।
किं ग्रहा दिवि न जाग्रति ते ते
भास्करस्य कतमस्तुलयास्ते ॥
तोयराशिरसि ते खलु कूपाः ।
किं ग्रहा दिवि न जाग्रति ते ते
भास्करस्य कतमस्तुलयास्ते ॥
अन्वयः
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अधिकक्षिति शतम् भूपाः आसते । (त्वं) तोयराशिः असि, ते खलु कूपाः (सन्ति) । किम् दिवि ते ते ग्रहाः न जाग्रति? भास्करस्य तुलया कतमः आस्ते?
Summary
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"A hundred kings exist on earth. But you are the ocean; they are mere wells. Do not various planets shine in the sky? But which one can be weighed in comparison to the sun?"
पदच्छेदः
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| आसते | आसते (√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | there are |
| शतम् | शत (१.१) | a hundred |
| अधिकक्षिति | अधिकक्षिति | on the earth |
| भूपाः | भूप (१.३) | kings |
| तोयराशिः | तोय–राशि (१.१) | an ocean |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you are |
| ते | तद् (१.३) | they |
| खलु | खलु | indeed |
| कूपाः | कूप (१.३) | wells |
| किम् | किम् | do |
| ग्रहाः | ग्रह (१.३) | planets |
| दिवि | दिव् (७.१) | in the sky |
| न | न | not |
| जाग्रति | जाग्रति (√जागृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | shine |
| ते | तद् (१.३) | those |
| ते | तद् (१.३) | various |
| भास्करस्य | भास्कर (६.१) | of the sun |
| कतमः | कतम (१.१) | which one |
| तुलया | तुला (३.१) | in comparison |
| आस्ते | आस्ते (√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | stands |
छन्दः
स्वागता [११: रनभगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | स | ते | श | त | म | धि | क्षि | ति | भू | पाः |
| तो | य | रा | शि | र | सि | ते | ख | लु | कू | पाः |
| किं | ग्र | हा | दि | वि | न | जा | ग्र | ति | ते | ते |
| भा | स्क | र | स्य | क | त | म | स्तु | ल | या | स्ते |
| र | न | भ | ग | ग | ||||||
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