त्वमुचितं नयनार्चिषि शंभुना
भुवनशान्तिकहोमहविः कृतः ।
तव वयस्यमपास्य मधुं मधुं
हतवता हरिणा बत किं कृतम् ॥
त्वमुचितं नयनार्चिषि शंभुना
भुवनशान्तिकहोमहविः कृतः ।
तव वयस्यमपास्य मधुं मधुं
हतवता हरिणा बत किं कृतम् ॥
भुवनशान्तिकहोमहविः कृतः ।
तव वयस्यमपास्य मधुं मधुं
हतवता हरिणा बत किं कृतम् ॥
अन्वयः
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शंभुना त्वम् भुवन शान्तिक होम हविः (कृत्वा) नयन अर्चिषि (हुतः इति) उचितं कृतः । बत तव वयस्यम् मधुम् (वसन्तं) अपास्य मधुम् (दैत्यं) हतवता हरिणा किम् कृतम्?
Summary
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It was proper that you were made an offering by Shambhu in the fire of his eye, a sacrifice for the peace of the world. But alas, what has Hari (Vishnu) accomplished by killing the demon Madhu, while ignoring your friend Madhu (the Spring season) who torments lovers?
पदच्छेदः
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| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| उचितं | उचितम् | properly |
| नयनार्चिषि | नयन–अर्चिस् (७.१) | in the fire of the eye |
| शंभुना | शंभु (३.१) | by Shambhu |
| भुवनशान्तिकहोमहविः | भुवन–शान्तिक–होम–हविस् (१.१) | the sacrificial offering in the rite for world peace |
| कृतः | कृत (√कृ+क्त, १.१) | were made |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| वयस्यम् | वयस्य (२.१) | friend |
| अपास्य | अपास्य (अप√अस्+ल्यप्) | ignoring |
| मधुं | मधु (२.१) | Madhu (Spring) |
| मधुं | मधु (२.१) | Madhu (the demon) |
| हतवता | हतवत् (√हन्+क्तवतु, ३.१) | by the one who killed |
| हरिणा | हरि (३.१) | by Hari |
| बत | बत | alas |
| किं | किम् (१.१) | what |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was done |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | मु | चि | तं | न | य | ना | र्चि | षि | शं | भु | ना |
| भु | व | न | शा | न्ति | क | हो | म | ह | विः | कृ | तः |
| त | व | व | य | स्य | म | पा | स्य | म | धुं | म | धुं |
| ह | त | व | ता | ह | रि | णा | ब | त | किं | कृ | तम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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