विधिरनंशममेद्यमवेक्ष्य ते
जनमनः खलु लक्षमकल्पयत् ।
अपि स वज्रमदास्यत चेत्तदा
त्वदिषुभिर्वदलिष्यदसावपि ॥
विधिरनंशममेद्यमवेक्ष्य ते
जनमनः खलु लक्षमकल्पयत् ।
अपि स वज्रमदास्यत चेत्तदा
त्वदिषुभिर्वदलिष्यदसावपि ॥
जनमनः खलु लक्षमकल्पयत् ।
अपि स वज्रमदास्यत चेत्तदा
त्वदिषुभिर्वदलिष्यदसावपि ॥
अन्वयः
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विधिः ते (आयुधम्) अनंशम् अमेद्यम् अवेक्ष्य जनमनः खलु लक्षम् अकल्पयत्। चेत् सः वज्रम् (लक्षम्) अदास्यत, तदा असौ अपि त्वदिषुभिः वदलिष्यत्।
Summary
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"Seeing your weapon was indivisible and unbreakable, Brahma surely made the human mind your target. For if he had given you the thunderbolt as a target, even that would have been split by your arrows."
पदच्छेदः
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| विधिः | विधि (१.१) | Brahma, |
| अनंशम् | अनंश (२.१) | indivisible |
| अमेद्यम् | अमेद्य (२.१) | and unbreakable, |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (अव√ईक्ष्+ल्यप्) | seeing |
| ते | युष्मद् (६.१) | your (weapon), |
| जनमनः | जन (६.३)–मनस् (२.१) | the human mind |
| खलु | खलु | surely |
| लक्षम् | लक्ष (२.१) | as the target |
| अकल्पयत् | अकल्पयत् (√कॢप् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made. |
| अपि | अपि | Also, |
| सः | तद् (१.१) | he |
| वज्रम् | वज्र (२.१) | the thunderbolt |
| अदास्यत | अदास्यत (√दा कर्तरि लृङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | had given (as a target), |
| चेत् | चेत् | if |
| तदा | तदा | then |
| त्वदिषुभिः | तव–इषु (३.३) | by your arrows |
| वदलिष्यत् | वदलिष्यत् (√वदल् कर्तरि लृङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would have been split |
| असौ | अदस् (१.१) | that |
| अपि | अपि | even. |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धि | र | नं | श | म | मे | द्य | म | वे | क्ष्य | ते |
| ज | न | म | नः | ख | लु | ल | क्ष | म | क | ल्प | यत् |
| अ | पि | स | व | ज्र | म | दा | स्य | त | चे | त्त | दा |
| त्व | दि | षु | भि | र्व | द | लि | ष्य | द | सा | व | पि |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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