स्मर नृशंसतमस्त्वमतो विधिः
सुमनसः कृतवान्भवदायुधम् ।
यदि धनुर्दृढमाशुगमायसं
तव सृजेत्त्रिजगत्प्रलयं व्रजेत् ॥
स्मर नृशंसतमस्त्वमतो विधिः
सुमनसः कृतवान्भवदायुधम् ।
यदि धनुर्दृढमाशुगमायसं
तव सृजेत्त्रिजगत्प्रलयं व्रजेत् ॥
सुमनसः कृतवान्भवदायुधम् ।
यदि धनुर्दृढमाशुगमायसं
तव सृजेत्त्रिजगत्प्रलयं व्रजेत् ॥
अन्वयः
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स्मर ! त्वं नृशंसतमः (असि)। अतः विधिः सुमनसः भवदायुधं कृतवान्। यदि (सः) तव दृढम् आयसं धनुः आशुगं (च) सृजेत्, (तर्हि) त्रिजगत् प्रलयं व्रजेत्।
Summary
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"O Kama, you are most cruel! Therefore, Brahma made flowers your weapon. If he were to create for you a strong iron bow and arrows, the three worlds would go to destruction."
पदच्छेदः
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| स्मर | स्मर (८.१) | O Kama, |
| नृशंसतमः | नृशंसतम (१.१) | most cruel |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you are. |
| अतः | अतः | Therefore, |
| विधिः | विधि (१.१) | Brahma |
| सुमनसः | सुमनस् (२.३) | flowers |
| कृतवान् | कृतवत् (√कृ+क्तवतु, १.१) | made |
| भवदायुधम् | भवत् (६.१)–आयुध (२.१) | your weapon. |
| यदि | यदि | If |
| धनुः | धनुस् (२.१) | a bow |
| दृढम् | दृढ (२.१) | strong |
| आशुगम् | आशुग (२.१) | and arrows |
| आयसम् | आयस (२.१) | of iron |
| तव | युष्मद् (६.१) | for you |
| सृजेत् | सृजेत् (√सृज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he were to create, |
| त्रिजगत् | त्रि–जगत् (१.१) | the three worlds |
| प्रलयम् | प्रलय (२.१) | to destruction |
| व्रजेत् | व्रजेत् (√व्रज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would go. |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्म | र | नृ | शं | स | त | म | स्त्व | म | तो | वि | धिः |
| सु | म | न | सः | कृ | त | वा | न्भ | व | दा | यु | धम् |
| य | दि | ध | नु | र्दृ | ढ | मा | शु | ग | मा | य | सं |
| त | व | सृ | जे | त्त्रि | ज | ग | त्प्र | ल | यं | व्र | जेत् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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