दृगुपहत्यपमृत्युविरूपताः
शमयतेऽपरनिर्जरसेविता ।
अतिशयान्ध्यवपुःक्षतिपाण्डुताः
स्मर भवन्ति भवन्तमुपासितुः ॥
दृगुपहत्यपमृत्युविरूपताः
शमयतेऽपरनिर्जरसेविता ।
अतिशयान्ध्यवपुःक्षतिपाण्डुताः
स्मर भवन्ति भवन्तमुपासितुः ॥
शमयतेऽपरनिर्जरसेविता ।
अतिशयान्ध्यवपुःक्षतिपाण्डुताः
स्मर भवन्ति भवन्तमुपासितुः ॥
अन्वयः
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स्मर ! अपरनिर्जरसेविता (देवता) दृगुपहत्यपमृत्युविरूपताः शमयते। भवन्तम् उपासितुः (तु) अतिशयान्ध्यवपुःक्षतिपाण्डुताः भवन्ति।
Summary
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"O Kama! Service to other gods alleviates blindness, untimely death, and ugliness. But for one who worships you, there is extreme blindness, bodily decay, and pallor."
पदच्छेदः
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| दृगुपहत्यपमृत्युविरूपताः | दृशः–उपहतिः–अपमृत्युः–विरूपता–च (१.३) | Blindness, untimely death, and ugliness |
| शमयते | शमयते (√शम् +णिच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | alleviates. |
| अपरनिर्जरसेविता | अपर–निर्जर–सेवित (१.१) | Service to other gods |
| अतिशयान्ध्यवपुःक्षतिपाण्डुताः | अतिशय–आन्ध्य–वपुः–क्षति–पाण्डुता (१.३) | extreme blindness, bodily decay, and pallor |
| स्मर | स्मर (८.१) | O Kama, |
| भवन्ति | भवन्ति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | occur |
| भवन्तम् | भवत् (२.१) | you |
| उपासितुः | उपासितृ (उप√आस्+तृच्, ६.१) | for one who worships. |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | गु | प | ह | त्य | प | मृ | त्यु | वि | रू | प | ताः |
| श | म | य | ते | ऽप | र | नि | र्ज | र | से | वि | ता |
| अ | ति | श | या | न्ध्य | व | पुः | क्ष | ति | पा | ण्डु | ताः |
| स्म | र | भ | व | न्ति | भ | व | न्त | मु | पा | सि | तुः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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