हृदयमाश्रयसे यदि ममाकं
ज्वलयसीत्थमनङ्ग तदेव किम् ।
स्वयमपि क्षणदग्धनिजेन्धनः
क्व भवितासि हताश हुताशवत् ॥
हृदयमाश्रयसे यदि ममाकं
ज्वलयसीत्थमनङ्ग तदेव किम् ।
स्वयमपि क्षणदग्धनिजेन्धनः
क्व भवितासि हताश हुताशवत् ॥
ज्वलयसीत्थमनङ्ग तदेव किम् ।
स्वयमपि क्षणदग्धनिजेन्धनः
क्व भवितासि हताश हुताशवत् ॥
अन्वयः
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अनङ्ग ! हताश ! यदि मम अकं हृदयं आश्रयसे, (तर्हि) तत् एव इत्थं किं ज्वलयसि? हुताशवत् स्वयं अपि क्षणदग्धनिजेन्धनः (सन्) क्व भवितासि?
Summary
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"O bodiless, hopeless Kama! If you take refuge in my painful heart, why do you burn that very thing? Like a fire that has consumed its own fuel in a moment, where will you exist yourself?"
पदच्छेदः
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| हृदयम् | हृदय (२.१) | heart |
| आश्रयसे | आश्रयसे (आ√श्रि कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you take refuge in, |
| यदि | यदि | if |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| अकम् | अक (२.१) | painful |
| ज्वलयसि | ज्वलयसि (√ज्वल् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do you burn |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| अनङ्ग | अनङ्ग (८.१) | O bodiless one! |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| एव | एव | very thing |
| किम् | किम् | why? |
| स्वयम् | स्वयम् | Yourself |
| अपि | अपि | also, |
| क्षणदग्धनिजेन्धनः | क्षणेन–दग्धम्–निजम्–इन्धनम्–येन–सः (१.१) | having burnt your own fuel in a moment, |
| क्व | क्व | where |
| भवितासि | भवितासि (√भू कर्तरि लुट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | will you be, |
| हताश | हताश (८.१) | O hopeless one, |
| हुताशवत् | हुताशवत् | like a fire? |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हृ | द | य | मा | श्र | य | से | य | दि | म | मा | कं |
| ज्व | ल | य | सी | त्थ | म | न | ङ्ग | त | दे | व | किम् |
| स्व | य | म | पि | क्ष | ण | द | ग्ध | नि | जे | न्ध | नः |
| क्व | भ | वि | ता | सि | ह | ता | श | हु | ता | श | वत् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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