सखि जरां परिपृच्छ तमः शिरः
सममसौ दधतापि कबन्धताम् ।
मगधराजवपुर्दलयुग्मव-
त्किम् इति न व्यतिसीव्यति केतुना ॥
सखि जरां परिपृच्छ तमः शिरः
सममसौ दधतापि कबन्धताम् ।
मगधराजवपुर्दलयुग्मव-
त्किम् इति न व्यतिसीव्यति केतुना ॥
सममसौ दधतापि कबन्धताम् ।
मगधराजवपुर्दलयुग्मव-
त्किम् इति न व्यतिसीव्यति केतुना ॥
अन्वयः
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सखि ! जराम् परिपृच्छ । असौ तमः शिरः कबन्धताम् दधता केतुना समम् अपि मगधराज-वपुः-दल-युग्मवत् किम् इति न व्यतिसीव्यति?
Summary
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"Friend, go ask the demoness Jara! Why is this head, Rahu, not stitched back together with its trunk, Ketu, even though they are together, just as she stitched the two halves of the Magadha king's (Jarasandha's) body?"
पदच्छेदः
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| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| जराम् | जरा (२.१) | the demoness Jara |
| परिपृच्छ | परिपृच्छ (परि√प्रछ् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | ask |
| तमः | तमस् (१.१) | darkness (Rahu) |
| शिरः | शिरस् (१.१) | the head |
| समम् | समम् | together |
| असौ | अदस् (१.१) | this |
| दधता | दधत् (√धा+शतृ, ३.१) | bearing |
| अपि | अपि | even |
| कबन्धताम् | कबन्धता (२.१) | the state of being a trunk |
| मगधराजवपुर्दलयुग्मवत् | मगधराज–वपुस्–दल–युग्म–वत् | like the two halves of the Magadha king's body |
| किम् | किम् | why |
| इति | इति | thus |
| न | न | not |
| व्यतिसीव्यति | व्यतिसीव्यति (वि+अति√सिव् undefined लट् (undefined) प्र.पु. एक.) | is stitched together |
| केतुना | केतु (३.१) | with Ketu (the trunk) |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | खि | ज | रां | प | रि | पृ | च्छ | त | मः | शि | रः |
| स | म | म | सौ | द | ध | ता | पि | क | ब | न्ध | ताम् |
| म | ग | ध | रा | ज | व | पु | र्द | ल | यु | ग्म | व |
| त्कि | मि | ति | न | व्य | ति | सी | व्य | ति | के | तु | ना |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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