स्मरसखौ रुचिभिः स्मरवैरिणा
मखमृगस्य यथा दलितं शिरः ।
सपदि संदधतुर्भिषजौ दिवः
सखि तथा तमसोऽपि करोतु कः ॥
स्मरसखौ रुचिभिः स्मरवैरिणा
मखमृगस्य यथा दलितं शिरः ।
सपदि संदधतुर्भिषजौ दिवः
सखि तथा तमसोऽपि करोतु कः ॥
मखमृगस्य यथा दलितं शिरः ।
सपदि संदधतुर्भिषजौ दिवः
सखि तथा तमसोऽपि करोतु कः ॥
अन्वयः
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सखि ! यथा स्मरवैरिणा दलितम् मखमृगस्य शिरः दिवः भिषजौ सपदि संदधतुः, तथा स्मरसखौ (विधौ) रुचिभिः (दलितम्) तमसः (शिरः) कः अपि (तथा) करोतु?
Summary
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"Friend, just as the two celestial physicians, the Ashvins, quickly reattached the head of the sacrificial deer (Daksha) after it was severed by Shiva, who can likewise fix the head of Rahu, which is tormented by the rays of the moon, Cupid's friend?"
पदच्छेदः
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| स्मरसखौ | स्मर–सखि (७.१) | by Cupid's friend (the moon) |
| रुचिभिः | रुचि (३.३) | with its rays |
| स्मरवैरिणा | स्मर–वैरिन् (३.१) | by the enemy of Cupid (Shiva) |
| मखमृगस्य | मख–मृग (६.१) | of the sacrificial deer (Daksha) |
| यथा | यथा | just as |
| दलितम् | दलित (√दल्+क्त, १.१) | was cut |
| शिरः | शिरस् (१.१) | the head |
| सपदि | सपदि | quickly |
| संदधतुः | संदधतुः (सम्√धा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | rejoined |
| भिषजौ | भिषज् (१.२) | the two physicians |
| दिवः | दिव् (६.१) | of heaven (the Ashvins) |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| तथा | तथा | so too |
| तमसः | तमस् (६.१) | of Rahu (darkness) |
| अपि | अपि | also |
| करोतु | करोतु (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | can make/fix |
| कः | किम् (१.१) | who |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्म | र | स | खौ | रु | चि | भिः | स्म | र | वै | रि | णा |
| म | ख | मृ | ग | स्य | य | था | द | लि | तं | शि | रः |
| स | प | दि | सं | द | ध | तु | र्भि | ष | जौ | दि | वः |
| स | खि | त | था | त | म | सो | ऽपि | क | रो | तु | कः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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