कुरु करे गुरुमेकमयोघनं
बहिरतो मुकुरं च कुरुष्व मे ।
विशति तत्र यदैव विधुस्तदा
सखि सुखादहितं जहि तं द्रुतम् ॥
कुरु करे गुरुमेकमयोघनं
बहिरतो मुकुरं च कुरुष्व मे ।
विशति तत्र यदैव विधुस्तदा
सखि सुखादहितं जहि तं द्रुतम् ॥
बहिरतो मुकुरं च कुरुष्व मे ।
विशति तत्र यदैव विधुस्तदा
सखि सुखादहितं जहि तं द्रुतम् ॥
अन्वयः
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सखि ! करे एकम् गुरुम् अयः-घनम् कुरु । अतः बहिः मे मुकुरम् च कुरुष्व । यदा एव विधुः तत्र विशति, तदा तम् अहितम् सुखात् द्रुतम् जहि ।
Summary
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"Friend, place a heavy iron hammer in my hand, and outside, hold up a mirror for me. When the moon's reflection enters it, then easily and quickly strike that enemy."
पदच्छेदः
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| कुरु | कुरु (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | place |
| करे | कर (७.१) | in my hand |
| गुरुम् | गुरु (२.१) | heavy |
| एकम् | एक (२.१) | one |
| अयोघनम् | अयस्–घन (२.१) | iron hammer |
| बहिः | बहिर् | outside |
| अतः | अतः | from this |
| मुकुरम् | मुकुर (२.१) | a mirror |
| च | च | and |
| कुरुष्व | कुरुष्व (√कृ कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | hold |
| मे | अस्मद् (४.१) | for me |
| विशति | विशति (√विश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | enters |
| तत्र | तत्र | there (in it) |
| यदा | यदा | when |
| एव | एव | just |
| विधुः | विधु (१.१) | the moon |
| तदा | तदा | then |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| सुखात् | सुख (५.१) | easily |
| अहितम् | अहित (२.१) | the enemy |
| जहि | जहि (√हन् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | strike |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| द्रुतम् | द्रुतम् | quickly |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | रु | क | रे | गु | रु | मे | क | म | यो | घ | नं |
| ब | हि | र | तो | मु | कु | रं | च | कु | रु | ष्व | मे |
| वि | श | ति | त | त्र | य | दै | व | वि | धु | स्त | दा |
| स | खि | सु | खा | द | हि | तं | ज | हि | तं | द्रु | तम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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