अयि ममैष चकोरशिशुर्मुनेः
व्रजति सिन्धुपिबस्य न शिष्यताम् ।
अशितुमब्धिमधीतवतोऽस्य च
शशिकराः पिबतः कति शीकराः ॥
अयि ममैष चकोरशिशुर्मुनेः
व्रजति सिन्धुपिबस्य न शिष्यताम् ।
अशितुमब्धिमधीतवतोऽस्य च
शशिकराः पिबतः कति शीकराः ॥
व्रजति सिन्धुपिबस्य न शिष्यताम् ।
अशितुमब्धिमधीतवतोऽस्य च
शशिकराः पिबतः कति शीकराः ॥
अन्वयः
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अयि ! मम एषः चकोरशिशुः सिन्धुपिबस्य मुनेः शिष्यताम् न व्रजति । अब्धिम् अशितुम् अधीतवतः अस्य पिबतः च शशिकराः कति शीकराः (भवेयुः)?
Summary
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"Oh! This baby Chakora bird of mine does not become a disciple of the ocean-drinking sage, Agastya. For one who has learned to consume the ocean, how many mere drops are the moonbeams he drinks?"
पदच्छेदः
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| अयि | अयि | Oh |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| चकोरशिशुः | चकोर–शिशु (१.१) | baby Chakora bird |
| मुनेः | मुनि (६.१) | of the sage |
| व्रजति | व्रजति (√व्रज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| सिन्धुपिबस्य | सिन्धु–पिबत् (√पा+शतृ, ६.१) | of the ocean-drinker (Agastya) |
| न | न | not |
| शिष्यताम् | शिष्यता (२.१) | discipleship |
| अशितुम् | अशितुम् (√अश्+तुमुन्) | to eat |
| अब्धिम् | अब्धि (२.१) | the ocean |
| अधीतवतः | अधीतवत् (अधि√इ+क्तवतु, ६.१) | of one who has learned |
| अस्य | इदम् (६.१) | for this (bird) |
| च | च | and |
| शशिकराः | शशि–कर (१.३) | the moonbeams |
| पिबतः | पिबत् (√पा+शतृ, ६.१) | drinking |
| कति | कति | how many |
| शीकराः | शीकर (१.३) | drops |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | यि | म | मै | ष | च | को | र | शि | शु | र्मु | नेः |
| व्र | ज | ति | सि | न्धु | पि | ब | स्य | न | शि | ष्य | ताम् |
| अ | शि | तु | म | ब्धि | म | धी | त | व | तो | ऽस्य | च |
| श | शि | क | राः | पि | ब | तः | क | ति | शी | क | राः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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