श्रवणपूरतमालदलाङ्कुरं
शशिकुरङ्गमुखे सखि निक्षिप ।
किमपि तुन्दिलितः स्थगयत्यमुं
सपदि तेन तदुच्छ्वसिमि क्षणम् ॥
श्रवणपूरतमालदलाङ्कुरं
शशिकुरङ्गमुखे सखि निक्षिप ।
किमपि तुन्दिलितः स्थगयत्यमुं
सपदि तेन तदुच्छ्वसिमि क्षणम् ॥
शशिकुरङ्गमुखे सखि निक्षिप ।
किमपि तुन्दिलितः स्थगयत्यमुं
सपदि तेन तदुच्छ्वसिमि क्षणम् ॥
अन्वयः
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सखि ! शशिकुरङ्ग-मुखे श्रवणपूर-तमाल-दल-अङ्कुरम् निक्षिप । तेन (सः) किम् अपि तुन्दिलितः (सन्) सपदि अमुम् (शशिनम्) स्थगयति । तत् क्षणम् उच्छ्वसिमि ।
Summary
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"Friend, place a sprout of a Tamala leaf, used as an ear-ornament, in the mouth of the deer on the moon. By that, becoming somewhat plump-cheeked, it will immediately cover the moon. Then, I can breathe a sigh of relief for a moment."
पदच्छेदः
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| श्रवणपूरतमालदलाङ्कुरम् | श्रवण–पूर–तमाल–दल–अङ्कुर (२.१) | a sprout of a Tamala leaf used as an ear-ornament |
| शशिकुरङ्गमुखे | शशि–कुरङ्ग–मुख (७.१) | in the mouth of the deer on the moon |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| निक्षिप | निक्षिप (नि√क्षिप् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | place |
| किमपि | किम्–अपि | somewhat |
| तुन्दिलितः | तुन्दिलित (१.१) | having become plump-cheeked |
| स्थगयति | स्थगयति (√स्थग +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it covers |
| अमुम् | अदस् (२.१) | him (the moon) |
| सपदि | सपदि | immediately |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| तत् | तद् | then |
| उच्छ्वसिमि | उच्छ्वसिमि (उद्√श्वस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I can breathe a sigh of relief |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | for a moment |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्र | व | ण | पू | र | त | मा | ल | द | ला | ङ्कु | रं |
| श | शि | कु | र | ङ्ग | मु | खे | स | खि | नि | क्षि | प |
| कि | म | पि | तु | न्दि | लि | तः | स्थ | ग | य | त्य | मुं |
| स | प | दि | ते | न | त | दु | च्छ्व | सि | मि | क्ष | णम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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