अन्वयः
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हरिणलाञ्छन ! अधुना स्वयशः-नव-डिण्डिमम् मुखरय । जलनिधेः कुलम् उज्ज्वलय । वधूवध-पौरुषम् अपि गृहाण । कदर्थनाम् मुञ्च ।
Summary
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"O deer-marked one (moon)! Now, sound the new drum of your fame, brighten the family of the ocean, and accept the 'valor' of killing a woman! Stop this torment."
पदच्छेदः
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| मुखरय | मुखरय (√मुखर +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | make resonant |
| स्वयशोनवडिण्डिमम् | स्व–यशस्–नव–डिण्डिम (२.१) | the new drum of your fame |
| जलनिधेः | जलनिधि (६.१) | of the ocean |
| कुलम् | कुल (२.१) | the family |
| उज्ज्वलय | उज्ज्वलय (उद्√ज्वल् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | make bright |
| अधुना | अधुना | now |
| अपि | अपि | also |
| गृहाण | गृहाण (√ग्रह् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | accept |
| वधूवधपौरुषम् | वधू–वध–पौरुष (२.१) | the valor of killing a woman |
| हरिणलाञ्छन | हरिण–लाञ्छन (८.१) | O deer-marked one |
| मुञ्च | मुञ्च (√मुच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | stop |
| कदर्थनाम् | कदर्थना (२.१) | the torment |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | ख | र | य | स्व | य | शो | न | व | डि | ण्डि | मं |
| ज | ल | नि | धेः | कु | ल | मु | ज्ज्व | ल | या | धु | ना |
| अ | पि | गृ | हा | ण | व | धू | व | ध | पौ | रु | षं |
| ह | रि | ण | ला | ञ्छ | न | मु | ञ्च | क | द | र्थ | नाम् |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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