दहनजा न पृथुर्दवथुव्यथा
विरहजैव पृथुर्यदि नेदृशम् ।
दहनमाशु विशन्ति कथं स्त्रियः
प्रियमपासुमुपासितुमुद्धुराः ॥
दहनजा न पृथुर्दवथुव्यथा
विरहजैव पृथुर्यदि नेदृशम् ।
दहनमाशु विशन्ति कथं स्त्रियः
प्रियमपासुमुपासितुमुद्धुराः ॥
विरहजैव पृथुर्यदि नेदृशम् ।
दहनमाशु विशन्ति कथं स्त्रियः
प्रियमपासुमुपासितुमुद्धुराः ॥
अन्वयः
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दहनजा दवथुव्यथा पृथुः न, विरहजा एव पृथुः । यदि ईदृशम् न, (तर्हि) अपासुम् प्रियम् उपासितुम् उद्धुराः स्त्रियः आशु दहनम् कथम् विशन्ति?
Summary
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The pain of burning born from fire is not great; only the pain born of separation is great. If this were not so, how could women, eager to follow their lifeless beloved, quickly enter the fire?
पदच्छेदः
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| दहनजा | दहनजा (१.१) | Born of fire |
| न | न | not |
| पृथुः | पृथु (१.१) | great |
| दवथुव्यथा | दवथुव्यथा (१.१) | the pain of burning |
| विरहजा | विरहजा (१.१) | born of separation |
| एव | एव | only |
| पृथुः | पृथु (१.१) | is great |
| यदि | यदि | if |
| न | न | not |
| ईदृशम् | ईदृश (१.१) | so |
| दहनम् | दहन (२.१) | fire |
| आशु | आशु | quickly |
| विशन्ति | विशन्ति (√विश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | enter |
| कथम् | कथम् | how |
| स्त्रियः | स्त्री (१.३) | women |
| प्रियम् | प्रिय (२.१) | the beloved |
| अपासुम् | अपासु (२.१) | lifeless |
| उपासितुम् | उपासितुम् (उप√आस्+तुमुन्) | to follow |
| उद्धुराः | उद्धुरा (१.३) | eager |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | ह | न | जा | न | पृ | थु | र्द | व | थु | व्य | था |
| वि | र | ह | जै | व | पृ | थु | र्य | दि | ने | दृ | शम् |
| द | ह | न | मा | शु | वि | श | न्ति | क | थं | स्त्रि | यः |
| प्रि | य | म | पा | सु | मु | पा | सि | तु | मु | द्धु | राः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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