हृदि विदर्भभुवोऽश्रुभृति स्फुटं
विनमदास्यतया प्रतिबिम्बितम् ।
मुखदृगोष्ठमरोपि मनोभुवा
तदुपमाकुसुमान्यखिलाः शराः ॥
हृदि विदर्भभुवोऽश्रुभृति स्फुटं
विनमदास्यतया प्रतिबिम्बितम् ।
मुखदृगोष्ठमरोपि मनोभुवा
तदुपमाकुसुमान्यखिलाः शराः ॥
विनमदास्यतया प्रतिबिम्बितम् ।
मुखदृगोष्ठमरोपि मनोभुवा
तदुपमाकुसुमान्यखिलाः शराः ॥
अन्वयः
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मनोभुवा विदर्भभुवः अश्रुभृति हृदि विनमदास्यतया स्फुटं प्रतिबिम्बितं मुख-दृक्-ओष्ठं (दृष्ट्वा) तदुपमाकुसुमानि अखिलाः शराः अरोपि ।
Summary
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Seeing the clear reflection of her face, eyes, and lips in her tear-filled heart, Cupid mistook them for his arrows—the lotus (face), the blue lotus (eyes), and the bandhuka flower (lips)—and planted them all there as his weapons.
पदच्छेदः
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| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| विदर्भभुवः | विदर्भभू (६.१) | of the princess of Vidarbha |
| अश्रुभृति | अश्रुभृत् (७.१) | filled with tears |
| स्फुटम् | स्फुटम् | clearly |
| विनमदास्यतया | विनमत्–आस्यता (३.१) | due to her bent-down face |
| प्रतिबिम्बितम् | प्रतिबिम्बित (प्रति√बिम्ब्+क्त, १.१) | reflected |
| मुखदृगोष्ठम् | मुख–दृश्–ओष्ठ (१.१) | the face, eyes, and lips |
| अरोपि | अरोपि (√रुह् +णिच्+चिण् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was planted |
| मनोभुवा | मनोभू (३.१) | by Cupid |
| तदुपमाकुसुमानि | तद्–उपमा–कुसुमानि (१.३) | the flowers that are their comparisons |
| अखिलाः | अखिल (१.३) | all |
| शराः | शर (१.३) | arrows |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हृ | दि | वि | द | र्भ | भु | वो | ऽश्रु | भृ | ति | स्फु | टं |
| वि | न | म | दा | स्य | त | या | प्र | ति | बि | म्बि | तम् |
| मु | ख | दृ | गो | ष्ठ | म | रो | पि | म | नो | भु | वा |
| त | दु | प | मा | कु | सु | मा | न्य | खि | लाः | श | राः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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