स्मरकृतां हृदयस्य मुहुर्दशां
बहु वदन्निव निःश्वसितानिलः ।
व्यधित वाससि कम्पमदः श्रिते
त्रसति कः सति नाश्रयबाधने ॥
स्मरकृतां हृदयस्य मुहुर्दशां
बहु वदन्निव निःश्वसितानिलः ।
व्यधित वाससि कम्पमदः श्रिते
त्रसति कः सति नाश्रयबाधने ॥
बहु वदन्निव निःश्वसितानिलः ।
व्यधित वाससि कम्पमदः श्रिते
त्रसति कः सति नाश्रयबाधने ॥
अन्वयः
AI
निःश्वसितानिलः हृदयस्य स्मरकृतां दशां मुहुः बहु वदन् इव अदः श्रिते वाससि कम्पं व्यधित । आश्रयबाधने सति कः न त्रसति?
Summary
AI
The wind of her sigh, as if repeatedly telling the sad story of her heart's condition caused by Cupid, made the garment she wore tremble. Indeed, who does not tremble when their very support is afflicted?
पदच्छेदः
AI
| स्मरकृताम् | स्मर–कृत (२.१) | caused by Cupid |
| हृदयस्य | हृदय (६.१) | of the heart |
| मुहुः | मुहुस् | again and again |
| दशाम् | दशा (२.१) | condition |
| बहु | बहु | much |
| वदन् | वदत् (√वद्+शतृ, १.१) | speaking |
| इव | इव | as if |
| निःश्वसितानिलः | निःश्वसित–अनिल (१.१) | the wind of her sigh |
| व्यधित | व्यधित (वि√धा कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused |
| वाससि | वासस् (७.१) | on the garment |
| कम्पम् | कम्प (२.१) | trembling |
| अदः | अदस् (२.१) | this |
| श्रिते | श्रित (√श्रि+क्त, ७.१) | resorted to |
| त्रसति | त्रसति (√त्रस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | trembles |
| कः | किम् (१.१) | who |
| सति | सत् (√अस्+शतृ, ७.१) | being |
| न | न | not |
| आश्रयबाधने | आश्रय–बाधन (७.१) | when the support is afflicted |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्म | र | कृ | तां | हृ | द | य | स्य | मु | हु | र्द | शां |
| ब | हु | व | द | न्नि | व | निः | श्व | सि | ता | नि | लः |
| व्य | धि | त | वा | स | सि | क | म्प | म | दः | श्रि | ते |
| त्र | स | ति | कः | स | ति | ना | श्र | य | बा | ध | ने |
| न | भ | भ | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.