हृदय एव तवास्ति स वल्लभः
तदपि किं दमयन्ति विषीदसि ।
हृदि परं न बहिः खलु वर्तते
सखि पयस्तत एव विषद्यते ॥
हृदय एव तवास्ति स वल्लभः
तदपि किं दमयन्ति विषीदसि ।
हृदि परं न बहिः खलु वर्तते
सखि पयस्तत एव विषद्यते ॥
तदपि किं दमयन्ति विषीदसि ।
हृदि परं न बहिः खलु वर्तते
सखि पयस्तत एव विषद्यते ॥
अन्वयः
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दमयन्ति ! सः वल्लभः तव हृदये एव अस्ति । तत् अपि किं विषीदसि? सखि ! (सः) हृदि परं वर्तते, बहिः खलु न (वर्तते) । ततः एव पयः (शरीरं) विषद्यते (विषीदति) ।
Summary
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(The friend says) "O Damayanti, that beloved of yours is right there in your heart. Even so, why do you grieve?" (Damayanti replies) "O friend, he exists only in my heart, not outside. For that very reason, my body languishes."
पदच्छेदः
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| हृदये | हृदय (७.१) | in the heart |
| एव | एव | only |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| सः | तद् (१.१) | that |
| वल्लभः | वल्लभ (१.१) | beloved |
| तदपि | तद्–अपि | even so |
| किं | किम् | why |
| दमयन्ति | दमयन्ती (८.१) | O Damayanti |
| विषीदसि | विषीदसि (वि√सद् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do you grieve |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| परं | परम् | only |
| न | न | not |
| बहिः | बहिर् | outside |
| खलु | खलु | indeed |
| वर्तते | वर्तते (√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | exists |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| पयः | पयस् (१.१) | body/life-force |
| तत | ततस् | therefore |
| एव | एव | only |
| विषद्यते | विषद्यते (वि√सद् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | languishes |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हृ | द | य | ए | व | त | वा | स्ति | स | व | ल्ल | भः |
| त | द | पि | किं | द | म | य | न्ति | वि | षी | द | सि |
| हृ | दि | प | रं | न | ब | हिः | ख | लु | व | र्त | ते |
| स | खि | प | य | स्त | त | ए | व | वि | ष | द्य | ते |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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