विधुविरोधितिथेरभिधायिनीं
ननु न किं पुनरिच्छसि कोकिलाम् ।
सखि किमर्थगवेषणया गिरं
किरति सेयमनर्थमयीं मयि ॥
विधुविरोधितिथेरभिधायिनीं
ननु न किं पुनरिच्छसि कोकिलाम् ।
सखि किमर्थगवेषणया गिरं
किरति सेयमनर्थमयीं मयि ॥
ननु न किं पुनरिच्छसि कोकिलाम् ।
सखि किमर्थगवेषणया गिरं
किरति सेयमनर्थमयीं मयि ॥
अन्वयः
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ननु विधु विरोधितिथेः अभिधायिनीं कोकिलां पुनः किं न इच्छसि? सखि ! सा इयम् (कोकिला) मयि अनर्थमयीं गिरं किरति । (तस्याः गिरः) अर्थ गवेषणया किम्?
Summary
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(The friend says) "Indeed, why do you not again desire the cuckoo, the announcer of the new moon day (when it is silent)?" (Damayanti replies) "O friend, this cuckoo showers disastrous words on me. What is the use of searching for meaning in them?"
पदच्छेदः
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| विधुविरोधितिथेः | विधु–विरोधिन्–तिथि (६.१) | of the date hostile to the moon |
| अभिधायिनीं | अभिधायिनी (२.१) | the announcer |
| ननु | ननु | indeed |
| न | न | not |
| किं | किम् | why |
| पुनः | पुनर् | again |
| इच्छसि | इच्छसि (√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do you desire |
| कोकिलाम् | कोकिला (२.१) | the cuckoo |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| किमर्थगवेषणया | किम्–अर्थ–गवेषणा (३.१) | what is the use of searching for meaning |
| गिरं | गिर् (२.१) | words |
| किरति | किरति (√कॄ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | showers |
| सेयम् | सा–इयम् (१.१) | this very (cuckoo) |
| अनर्थमयीं | अनर्थमयी (२.१) | disastrous |
| मयि | अस्मद् (७.१) | on me |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धु | वि | रो | धि | ति | थे | र | भि | धा | यि | नीं |
| न | नु | न | किं | पु | न | रि | च्छ | सि | को | कि | लाम् |
| स | खि | कि | म | र्थ | ग | वे | ष | ण | या | गि | रं |
| कि | र | ति | से | य | म | न | र्थ | म | यीं | म | यि |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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