तथाभिधात्रीमथ राजपुत्रीं
निर्णीय तां नैषधबद्धरागाम् ।
अमोचि चञ्चूपुटमौनमुद्रा
विहायसा तेन विहस्य भूयः ॥
तथाभिधात्रीमथ राजपुत्रीं
निर्णीय तां नैषधबद्धरागाम् ।
अमोचि चञ्चूपुटमौनमुद्रा
विहायसा तेन विहस्य भूयः ॥
निर्णीय तां नैषधबद्धरागाम् ।
अमोचि चञ्चूपुटमौनमुद्रा
विहायसा तेन विहस्य भूयः ॥
अन्वयः
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अथ तेन विहायसा तथा अभिधात्रीम्, नैषध-बद्ध-रागाम् ताम् राजपुत्रीम् निर्णीय, भूयः विहस्य चञ्चू-पुट-मौन-मुद्रा अमोचि।
Summary
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"Then, having ascertained that the princess who was speaking thus had her love firmly fixed on Nala, the bird (swan), smiling again, released the seal of silence from his beak."
पदच्छेदः
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| तथा | तथा | thus |
| अभिधात्रीम् | अभिधातृ (अभि√धा+तृच्, २.१) | the one who was speaking |
| अथ | अथ | then |
| राजपुत्रीम् | राजपुत्री (२.१) | the princess |
| निर्णीय | निर्णीय (निर्√नी+ल्यप्) | having ascertained |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| नैषधबद्धरागाम् | नैषध–बद्ध (√बन्ध्+क्त)–राग (२.१) | as one whose love is fixed on Nala |
| अमोचि | अमोचि (√मुच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was released |
| चञ्चूपुटमौनमुद्रा | चञ्चू–पुट–मौन–मुद्रा (१.१) | the seal of silence of his beak |
| विहायसा | विहायस् (३.१) | by the bird |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| विहस्य | विहस्य (वि√हस्+ल्यप्) | having smiled |
| भूयः | भूयस् | again |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | था | भि | धा | त्री | म | थ | रा | ज | पु | त्रीं |
| नि | र्णी | य | तां | नै | ष | ध | ब | द्ध | रा | गाम् |
| अ | मो | चि | च | ञ्चू | पु | ट | मौ | न | मु | द्रा |
| वि | हा | य | सा | ते | न | वि | ह | स्य | भू | यः |
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