उन्मत्तमासाद्य हरः स्मरश्च
द्वावप्यसीमां मुदमुद्वहेते ।
पूर्वः परस्पर्धितया प्रसूनं
नूनं द्वितीयो विरहाधिदूनम् ॥
उन्मत्तमासाद्य हरः स्मरश्च
द्वावप्यसीमां मुदमुद्वहेते ।
पूर्वः परस्पर्धितया प्रसूनं
नूनं द्वितीयो विरहाधिदूनम् ॥
द्वावप्यसीमां मुदमुद्वहेते ।
पूर्वः परस्पर्धितया प्रसूनं
नूनं द्वितीयो विरहाधिदूनम् ॥
अन्वयः
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हरः स्मरः च द्वौ अपि उन्मत्तम् आसाद्य असीमाम् मुदम् उद्वहेते। पूर्वः पर-स्पर्धितया प्रसूनम् (आसाद्य मुदम् उद्वहते), नूनम् द्वितीयः विरह-अधि-दूनम् (आसाद्य मुदम् उद्वहते)।
Summary
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"Both Shiva and Kama experience boundless joy upon obtaining an 'unmatta' (intoxicated one). The former obtains the Unmatta (Datura) flower, while the latter, as if in rivalry, obtains a person maddened and afflicted by the pain of separation."
पदच्छेदः
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| उन्मत्तम् | उन्मत्त (उद्√मद्+क्त, २.१) | the intoxicated one |
| आसाद्य | आसाद्य (आ√सद्+ल्यप्) | having obtained |
| हरः | हर (१.१) | Shiva |
| स्मरः | स्मर (१.१) | Kama |
| च | च | and |
| द्वौ | द्वि (१.२) | both |
| अपि | अपि | also |
| असीमाम् | असीम (२.१) | boundless |
| मुदम् | मुद् (२.१) | joy |
| उद्वहेते | उद्वहेते (उद्√वह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | experience |
| पूर्वः | पूर्व (१.१) | the former (Shiva) |
| परस्पर्धितया | पर–स्पर्धा (३.१) | out of rivalry with the other |
| प्रसूनम् | प्रसून (२.१) | a flower (Datura) |
| नूनम् | नूनम् | certainly |
| द्वितीयः | द्वितीय (१.१) | the second (Kama) |
| विरहाधिदूनम् | विरह–अधि–दून (√दू+क्त, २.१) | one afflicted by the pain of separation |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | न्म | त्त | मा | सा | द्य | ह | रः | स्म | र | श्च |
| द्वा | व | प्य | सी | मां | मु | द | मु | द्व | हे | ते |
| पू | र्वः | प | र | स्प | र्धि | त | या | प्र | सू | नं |
| नू | नं | द्वि | ती | यो | वि | र | हा | धि | दू | नम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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